न्यूजीलैंड बनाम अफगानिस्तान टेस्ट : नोएडा में इस वजह से पहले दिन नहीं हो सका खेल
घटिया जल निकासी, गीली आउटफील्ड और दयनीय सुविधाओं की वजह से अफगानिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच एकमात्र टेस्ट का पहला दिन एक भी गेंद फेंके बिना रद्द कर दिया।

दोनों देशों के बीच पहले टेस्ट की तैयारी बारिश से प्रभावित हुई थी और न्यूजीलैंड एक भी अभ्यास सत्र ठीक से पूरा नहीं कर पाया था। रात में बूंदाबांदी के अलावा पूरे दिन बारिश नहीं हुई, आधुनिक सुविधाओं की कमी के कारण अनुभवहीन मैदानकर्मियों को मैदान तैयार करने में संघर्ष करना पड़ा।
अंपायरों ने पूरे दिन में छह बार निरीक्षण किया। कप्तान टिम साउथी, ऑलराउंडर मिशेल सेंटनर और रचिन रविंद्र सहित न्यूजीलैंड के कई खिलाड़ी मैदान का जायजा लेने आए। मिड-ऑन और मिड विकेट चिंता का विषय लग रहा था, 30 गज के घेरे के अंदर कई पैच थे।

अफगानिस्तान के कोच जोनाथन ट्रॉट मैदानकर्मियों के संघर्ष से नाखुश दिखे। सुपर सोपर्स दोपहर एक बजे के बाद ही लगाये गये। शाम चार बजे पहला दिन रद्द कर दिया गया। कल सुबह नौ बजे टॉस का समय तय है और बचे हुए चार दिन में 98 ओवर होंगे जो सुबह 10 बजे के बजाय सुबह 9.30 बजे शुरू होंगे।
मैदानकर्मियों ने अफगानिस्तान के ट्रेनिंग सत्र के लिए मैदान को सुखाने के लिए टेबल फैन का इस्तेमाल किया था। आधुनिक सुविधाओं की कमी मैदान के बाहर तक फैली हुई थी जिससे पिच के बाहर के संचालन पर असर पड़ा।
मीडिया के लिए स्टैंड और प्रशंसकों के लिए बैठने की व्यवस्था नहीं थी। ‘एक्रिडिटिड’ मीडिया के लिए पानी की कमी, बिजली की आपूर्ति और महिला शौचालय तक की कमी थी जिससे सबको कई असुविधाओं का सामना करना पड़ा।
प्रशंसकों को पता नहीं था कि क्या हो रहा है, घोषणा प्रणाली की व्यवस्था नहीं थी। एसीबी के एक अधिकारी ने कहा, ‘‘बहुत गड़बड़ी है, हम यहां कभी वापस नहीं आएंगे।
खिलाड़ी भी यहां की सुविधाओं से नाखुश हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमने संबंधित लोगों से पहले ही बात कर ली थी और स्टेडियम के लोगों ने हमें आश्वासन दिया था कि मीडिया सुविधाओं के संबंध में सब कुछ ठीक रहेगा।
ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण द्वारा चलाये जा रहे इस स्टेडियम ने 2016 में गुलाबी गेंद के दलीप ट्रॉफी मैच की मेजबानी की थी।
कॉरपोरेट मैचों के दौरान मैच फिक्सिंग के कारण सितंबर 2017 में बीसीसीआई ने इसे प्रतिबंधित कर दिया था। तब से यहां बीसीसीआई से संबद्ध कोई भी मैच आयोजित नहीं किया गया है। स्टेडियम पहले अफगानिस्तान के लिए घरेलू मैदान के रूप में काम कर चुका है। यह स्टेडियम उत्तर प्रदेश क्रिकेट संघ के अंतर्गत नहीं आता है, यह देखना दिलचस्प होगा कि बीसीसीआई उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला मामले को सुलझा पाते हैं या नहीं।