जस्टिस यशवंत वर्मा विवाद: सीजेआई ने बार एसोसिएशन के नेताओं को दिया आश्वासन तो मिला ये जवाब

बीएस राय। भारत के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने गुरुवार को बार नेताओं को आश्वासन दिया कि वे दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के स्थानांतरण की कॉलेजियम की सिफारिश को वापस लेने की उनकी मांग पर विचार करेंगे।
विभिन्न उच्च न्यायालयों के छह बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों ने दोपहर में मुख्य न्यायाधीश और कॉलेजियम के अन्य सदस्यों – न्यायमूर्ति बी आर गवई, सूर्यकांत, अभय एस ओका और विक्रम नाथ से मुलाकात की। यह जानकारी इलाहाबाद उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल तिवारी ने दी।
तिवारी ने शीर्ष अदालत में आयोजित बैठक से बाहर आने के बाद कहा कि उन्होंने बार निकायों के ज्ञापन पर विचार-विमर्श किया और उनकी मांग पर विचार करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय बार निकाय इस बात पर पुनर्विचार करेगा कि अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रखी जाए या नहीं।
न्यायमूर्ति वर्मा को उनके मूल उच्च न्यायालय में वापस भेजे जाने के प्रस्ताव के विरोध में इलाहाबाद उच्च न्यायालय बार एसोसिएशन 25 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है। इससे पहले दिन में इलाहाबाद, गुजरात, केरल, जबलपुर, कर्नाटक और लखनऊ उच्च न्यायालयों के बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों ने सीजेआई कार्यालय को ज्ञापन सौंपकर न्यायमूर्ति खन्ना से मिलने के लिए समय मांगा।
न्यायमूर्ति वर्मा के आधिकारिक आवास पर साक्ष्यों के साथ कथित छेड़छाड़ की ओर इशारा करते हुए, जहां 14 मार्च को आग लगने की घटना के दौरान नकदी की जली हुई गड्डियां मिली थीं, सदस्यों ने घटना में एफआईआर दर्ज न किए जाने पर सवाल उठाया।
ज्ञापन में बार निकायों ने पारदर्शिता अपनाने और दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट तथा अन्य सामग्री को सर्वोच्च न्यायालय की वेबसाइट पर सार्वजनिक करने के लिए सीजेआई द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की।
ज्ञापन में कहा गया है, “बार एसोसिएशन मुख्य न्यायाधीश और कॉलेजियम से न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का तबादला वापस लेने तथा न्यायिक कार्य के अलावा सभी प्रशासनिक कार्य वापस लेने का अनुरोध करते हैं।” ज्ञापन में मुख्य न्यायाधीश से मामले में आपराधिक कानून लागू करने का आग्रह करते हुए दावा किया गया है कि दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट के अनुसार, आग की घटना के एक दिन बाद किसी ने न्यायमूर्ति वर्मा के आवास से सामान हटा दिया था।
इसमें कहा गया है, “इस तरह के अपराधों में अन्य लोगों की संलिप्तता होगी और (एफआईआर दर्ज नहीं होने से) उनके अभियोजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।” 14 मार्च को रात करीब 11.35 बजे न्यायमूर्ति वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित आवास में आग लगने के बाद कथित नकदी बरामद हुई, जिसके बाद अग्निशमन अधिकारी मौके पर पहुंचे।
विवाद के मद्देनजर सर्वोच्च न्यायालय के कॉलेजियम ने न्यायमूर्ति वर्मा को उनके पैतृक इलाहाबाद उच्च न्यायालय में वापस भेजने की सिफारिश की, जिनसे मुख्य न्यायाधीश के निर्देश के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने कार्यभार वापस ले लिया था। 22 मार्च को मुख्य न्यायाधीश ने आरोपों की आंतरिक जांच करने के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की और घटना में दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय की जांच रिपोर्ट अपलोड करने का निर्णय लिया। न्यायमूर्ति वर्मा ने आरोपों की निंदा की है और कहा है कि उनके या उनके परिवार के किसी सदस्य द्वारा स्टोर रूम में कभी भी नकदी नहीं रखी गई।