योग गुरु बाबा रामदेव और केरल हाइकोर्ट से मिली बड़ी राहत, दिया ये बड़ा निर्देश

बीएस राय। केरल उच्च न्यायालय ने गुरुवार को योग गुरु बाबा रामदेव, उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण और उनकी कंपनी दिव्य फार्मेसी के खिलाफ एक “भ्रामक” विज्ञापन मामले में निचली अदालत में चल रही सभी कार्यवाही पर रोक लगा दी।
न्यायमूर्ति वी जी अरुण ने पलक्कड़ मजिस्ट्रेट अदालत में चल रही कार्यवाही पर तीन महीने के लिए रोक लगाते हुए कहा कि उनके दावे में प्रथम दृष्टया दम है कि अपराध का संज्ञान समय सीमा के बाद लिया गया था।
“वरिष्ठ वकील (याचिकाकर्ताओं के लिए) की दलील में प्रथम दृष्टया दम नज़र आता है कि ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 की धारा 7 के साथ-साथ बीएनएसएस, 2023 की धारा 550 के अनुसार, अपराध का संज्ञान सीमा अवधि से परे लिया जाता है।
“इसलिए, पलक्कड़ के प्रथम श्रेणी द्वितीय के न्यायिक मजिस्ट्रेट की फाइलों पर एसटी संख्या 1547/2024 में आगे की कार्यवाही पर तीन महीने के लिए अंतरिम रोक रहेगी,” उच्च न्यायालय ने कहा।
कंपनी, रामदेव और बालकृष्ण द्वारा मामले में उनके खिलाफ कार्यवाही को रद्द करने की मांग करने वाली याचिका पर अंतरिम आदेश जारी किया गया था।
उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार और पलक्कड़ के औषधि निरीक्षक कार्यालय को भी नोटिस जारी किया, जिसमें अगली सुनवाई की तारीख 30 जून तक याचिका पर अपना पक्ष रखने को कहा गया।
रामदेव और अन्य के खिलाफ कार्यवाही पलक्कड़ के औषधि निरीक्षक की शिकायत पर यह कार्रवाई की गई।
शिकायत के आधार पर उनके खिलाफ औषधि एवं जादुई उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम 1954 की धारा 3(डी) सह धारा 7(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया।
अधिनियम की धारा 3 कुछ बीमारियों और विकारों के उपचार के लिए कुछ दवाओं के विज्ञापन पर रोक लगाती है और धारा 7 अधिनियम के प्रावधानों के उल्लंघन के लिए दंड का प्रावधान करती है।