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प्रिंस ऑफ कोलकाता @53: जिसने टीम इंडिया को नई पहचान दी और मैच विनर्स गढ़े

पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली मंगलवार (आठ जुलाई) को 53 साल के हो गए। वह भारतीय टीम के सबसे सफल कप्तानों में एक हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होंने युवाओं को मौका दिया और नई टीम इंडिया बनाई। उनकी कप्तानी में डेब्यू करने वाले खिलाड़ियों ने 2007 टी20 विश्व कप और 2011 वनडे विश्व कप जीत में अहम भूमिका निभाई।

साभार : गूगल

गांगुली को माता-पिता ‘महाराज’ कहते थे। वहीं, इंग्लैंड के पूर्व दिग्गज जैफ्री बॉयकॉट ने उन्हें ‘प्रिस ऑफ कोलकाता’ बोला था। उनके ये दोनों नाम काफी मशहूर हुए। बीसीसीआई अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यकाल समाप्त होने के बाद गांगुली आईपीएल में सक्रिय रहे हैं।

दिल्ली कैपिटल्स की टीम ने उन्हें संचालन निदेशक बनाया था। गांगुली की कप्तानी में भारत चैंपियंस ट्रॉफी 2002 में संयुक्त विजेता बनी थी। इंग्लैंड में नेटवेस्ट ट्रॉफी में उन्होंने भारत को चैंपियन बनाया था। वहीं, 2003 विश्व कप के फाइनल में उन्होंने टीम को पहुंचाया था। तब खिताब जीतने का सपना पूरा नहीं हुआ था। 2004 में उनकी कप्तानी में टीम पाकिस्तान गई और वनडे-टेस्ट सीरीज में जीत मिली थी।

अपनी कप्तानी में गांगुली ने कई युवा प्रतिभाओं को तैयार किया और उन्हें मौके दिए। टीम इंडिया में वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह, युवराज सिंह, जहीर खान और महेंद्र सिंह धोनी जैसे खिलाड़ी शामिल हुए, जो आगे चलकर महान क्रिकेटर बने। वनडे में लगातार चार बार मैन ऑफ द मैच पुरस्कार जीतने की सौरव गांगुली की बेजोड़ उपलब्धि एक विश्व रिकॉर्ड बनी हुई है, जो उनके शीर्ष फॉर्म के दौरान उनकी अविश्वसनीय स्थिरता और प्रभाव को दर्शाती है।

गांगुली वनडे में सबसे ज्यादा रन (11363) बनाने के मामले में नौवें स्थान पर हैं। भारतीयों में वह सचिन तेंदुलकर और विराट कोहली के बाद तीसरे पायदान पर हैं। वह भारत के सर्वकालिक महान भारतीय बल्लेबाजों में से एक हैं। सौरव गांगुली के चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में सबसे बड़ा स्कोर (117 रन) बनाने का रिकॉर्ड दर्ज है।

2000 आईसीसी नॉकआउट फाइनल में उनकी 117 रन की पारी इस टूर्नामेंट के फाइनल में सर्वोच्च स्कोर बनी हुई है, जो उनके बड़े मैच का प्लेयर होने का प्रमाण है। उन्होंने साल 2000 में न्यूजीलैंड के खिलाफ 117 रन बनाए थे। गांगुली ने आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी मैचों में तीन शतक लगाने वाले पहले क्रिकेटर बनकर इतिहास रच दिया था।

उतार-चढ़ाव के बावजूद गांगुली का टेस्ट बल्लेबाजी औसत उनके 113 मैचों के करियर में लगातार 40 से ऊपर रहा, जिससे सबसे लंबे प्रारूप में वह एक भरोसेमंद बल्लेबाज कहलाए। सौरव गांगुली के नाम वनडे विश्व कप में भारत के लिए सबसे बड़ा स्कोर बनाने का रिकॉर्ड है।

1999 के विश्व कप में श्रीलंका के खिलाफ टांटन में उनकी 183 रन की पारी आज भी विश्व कप इतिहास में किसी भारतीय द्वारा बनाया गया सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर है, एक ऐसा रिकॉर्ड जो दो दशकों से भी अधिक समय से अछूता है। गांगुली के टेस्ट करियर में एक अजब सी चीज देखने को मिली।

लॉर्ड्स में उन्होंने टेस्ट डेब्यू पर शतक जड़ा था और अंतिम पारी में पहली गेंद पर आउट हुए और खाता नहीं खोल सके। यह क्रिकेट की दुनिया में अब तक एक अनूठी और रोचक बात बनी हुई है।

2003 के विश्व कप में गांगुली ने तीन शतक लगाए, जो किसी भी भारतीय बल्लेबाज द्वारा एक संस्करण में बनाए गए सर्वाधिक शतक हैं। यह वैश्विक मंच पर उनके दबदबे को बताता है।

सौरव गांगुली उन पांच खिलाड़ियों में हैं, जिन्होंने वनडे में 10 हजार रन, 100 विकेट और 100 कैच लिए हैं। सौरव गांगुली को टेस्ट में बेहतरीन कप्तान के रूप में गिना जाता है। उनके नेतृत्व में भारत ने विदेशों में 28 में 11 टेस्ट जीते थे। उनके इस रिकॉर्ड को कोहली ने तोड़ा था।