Trending

टीम इंडिया की शिकायत, इंग्लैंड को ‘तरजीही’ व्यवहार का आरोप

इंग्लैंड दौरे पर भारतीय टीम के साथ सबकुछ ठीक नहीं है, कभी अंपायर की अंपायर्स कॉल भारत को ले डूबती है तो कभी अंपायर का बॉल चेंज करने के प्रति रवैया अच्छा नहीं दिखता।

साभार : गूगल

अब आखिरी टेस्ट से पहले पिच क्यूरेटर के साथ हुआ बवाल किसी से छिपा नहीं है। इस बीच भारतीय टीम मैनेजमेंट ने मैच रेफरी से बॉल चेंज प्रोटोकॉल को लेकर शिकायत की है। लंदन के लॉर्ड्स में खेले गए तीसरे मैच के दौरान टीम इंडिया को बॉल चेंज का बड़ा नुकसान हुआ था।

एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय टीम मैनेजमेंट का यह भी मानना है कि गेंदों के चयन में इंग्लैंड को ‘तरजीही’ व्यवहार दिया गया और यह मुद्दा आईसीसी मैच रेफरी के समक्ष आधिकारिक रूप से उठाया गया है।

लॉर्ड्स में खेले गए तीसरे टेस्ट में इंग्लैंड की पहली पारी के दौरान विवाद तब खड़ा हो गया जब भारत द्वारा इस्तेमाल की गई दूसरी नई गेंद सिर्फ 10 ओवर में ही खराब हो गई।

नियमों के अनुसार रिप्लेसमेंट में वैसी ही स्थिति की गेंद मिलनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत को जो गेंद दी गई वह 10 ओवर की जगह लगभग 30 से 35 ओवर पुरानी थी। अंपायरों ने टीम को बताया कि स्टॉक में ऐसी कोई गेंद नहीं थी, जो मूल गेंद से मेल खाती हो।

भारतीय टीम के एक अधिकारी ने अखबार को बताया, “लॉर्ड्स में लगभग 10 ओवर के बाद ड्यूक्स गेंद ने अपना आकार खो दिया था, ऐसा सीरीज में अक्सर होता आ रहा है। गेंद उन रिंग्स से नहीं गुजर पाई, जो अंपायर मैदान पर यह जांचने के लिए रखते हैं कि गेंद एक समान गोलाकार है या नहीं।

हालांकि, अंपायरों के पास 10 ओवर पुरानी गेंद नहीं थी, इसलिए मैच के एक अहम मोड़ पर भारतीय टीम को 30-35 ओवर पुरानी गेंद दी गई।” बॉल चेंज करना टीम पर भारी पड़ गया। अधिकारी ने बताया, “इसके बाद खेल कैसे बदला, यह देखने के लिए स्कोरबोर्ड देखिए।

गेंदबाजों की स्विंग कम हो गई और इंग्लैंड ने आसानी से रन बना लिए।” भारतीय टीम मैनेजमेंट ने मैच रेफरी से भी अनुरोध किया कि उन्हें खराब हुई मूल गेंद पर लौटने की अनुमति दी जाए, लेकिन नियमों के कारण ऐसा करने से मना कर दिया गया। अधिकारी ने आगे बताया, “जब आप गेंद बदलने के लिए कहते हैं, तो आपको यह नहीं बताया जाता कि आपको मिलने वाली गेंद कितनी पुरानी होगी। लॉर्ड्स में, हमें यह नहीं बताया गया था कि जो गेंद आएगी वह 30 से 35 ओवर पुरानी होगी।

अगर हमें बताया जाता, तो हम 10 ओवर तक इस्तेमाल की गई विकृत गेंद से ही खेलते रहते। आईसीसी को हस्तक्षेप करना चाहिए। इस नियम को बदलना होगा।”

एक क्रिकेट साइट की रिपोर्ट में डाटा रिपोर्ट भारत की शिकायत को और पुष्ट करती है। मूल दूसरी नई गेंद औसतन 1.869 डिग्री स्विंग और 0.579 डिग्री सीम दे रही थी। इसके विपरीत जो गेंद मिली गेंद केवल 0.855 डिग्री स्विंग दे रही थी, जिससे भारत की धार काफी कम हो गई। इंग्लैंड ने अंततः मैच 22 रनों से जीतकर श्रृंखला में 2-1 की बढ़त बना ली।