कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 : भारत की ऐतिहासिक दावेदारी पर केंद्रीय कैबिनेट की मुहर
प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में कैबिनेट ने बुधवार (27 अगस्त) को भारत की कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी की दावेदारी को मंजूरी दे दी। कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी के लिए अहमदाबाद शहर पर मुहर लगी है। ‘विश्व स्तरीय स्टेडियमों, अत्याधुनिक अभ्यास सुविधाओं और खेल संस्कृति’ के कारण अहमदाबाद को आदर्श मेजबान बताया।

कैबिनेट ने भारतीय ओलंपिक संघ के सहमति जताने के कुछ दिन बाद ही यह फैसला लिया। भारत ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की दावेदारी की इच्छा जताने वाला आशय पत्र जमा कर दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, ”प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने राष्ट्रमंडल खेलों 2030 की दावेदारी के युवा कार्य और खेल मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।”
साथ ही बताया गया , ”कैबिनेट ने संबंधित मंत्रालयों, विभागों और प्राधिकरणों से आवश्यक गारंटियों के साथ मेजबान सहयोग समझौते (एचसीए) पर हस्ताक्षर करने और बोली स्वीकार होने की स्थिति में गुजरात सरकार को आवश्यक अनुदान सहायता की मंजूरी देने को भी मंजूरी दे दी।”
दावेदारी के लिए बोली जमा करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त है। आईओए अगले 48 घंटे में प्रक्रिया पूरी कर सकता है। भारत ने आखिरी बार साल 2010 में कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की थी। तब राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन राजधानी दिल्ली में हुआ था।
72 देशों के एथलीट कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा लेते हैं। इसमें बड़ी संख्या में एथलीट, कोच, तकनीकी अधिकारी, पर्यटक आदि शामिल होते हैं, जो मेजाबन देश जाते हैं।
भारत अगर मेजबानी हासिल करने में कामयाब रहा तो स्थानीय व्यवसायों को लाभ होगा और राजस्व प्राप्त होगा। साथ ही यह एथलीटों की नई पीढ़ी को खेलों को एक करियर विकल्प के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।
भारतीय ओलंपिक संघ ने 13 अगस्त को अपनी विशेष आम बैठक (एसजीएम) के दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 के लिए देश की बोली को औपचारिक रूप से मंजूरी दी थी। आईओए अध्यक्ष पीटी उषा ने उस वक्त कहा था कि अहमदाबाद के साथ-साथ दिल्ली और भुवनेश्वर पर भी विचार किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ”कुछ परिस्थितियों के कारण 2026 में ग्लासगो में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में कम खेल शामिल किए गए। अगर हमें 2030 के राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी मिलती है तो उसमें सभी खेल शामिल किए जाएंगे।”
उनका इशारा ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की छोटी सूची की ओर था, जिसमें हॉकी, बैडमिंटन, कुश्ती और निशानेबाजी जैसे प्रमुख खेलों को लागत का हवाला देते हुए हटा दिया गया।