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विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप 2025 : भारतीय मुक्केबाज़ों की बड़ी चुनौती

भारतीय मुक्केबाज गुरुवार से खेले जाने वाले विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में अपने पिछले प्रदर्शन को सुधारने या उसकी बराबरी करने के इरादे से रिंग में उतरेंगे।

इस बार उन्हें दुनिया के शीर्ष मुक्केबाजों की कड़ी चुनौती का सामना करना होगा, जिससे उनकी राह आसान नहीं होगी। इस बार पहली बार यह प्रतियोगिता वर्ल्ड बॉक्सिंग — मुक्केबाजी की नई वैश्विक शासी संस्था — के तत्वावधान में आयोजित हो रही है, और इसमें पुरुष एवं महिला दोनों वर्गों के मुकाबले एक साथ होंगे।

भारत ने 2023 में नई दिल्ली में आयोजित महिला चैंपियनशिप में चार स्वर्ण पदक जीते थे, जबकि पुरुषों ने उसी साल ताशकंद में आयोजित चैंपियनशिप में तीन कांस्य पदक हासिल किए थे।

हालांकि इसके बाद एशियाई खेलों और पेरिस ओलंपिक जैसी बड़ी प्रतियोगिताओं में भारतीय मुक्केबाज अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतर सके। हाल ही में भारतीय मुक्केबाजों ने विश्व मुक्केबाजी कप में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन विश्व चैंपियनशिप का स्तर कहीं अधिक ऊंचा होता है।

इस बार प्रतियोगिता में 65 से अधिक देशों के 550 से अधिक मुक्केबाज हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें पेरिस ओलंपिक के 17 पदक विजेता भी शामिल हैं।

दो बार की विश्व चैंपियन निकहत ज़रीन और टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन एक साल के अंतराल के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वापसी कर रही हैं।

हालांकि दोनों ने सीमित तैयारी के साथ इस टूर्नामेंट में हिस्सा लिया है और तीनों विश्व मुक्केबाजी कप में भाग न लेने की वजह से वे गैरवरीय होंगी, जिससे उन्हें शुरुआती दौर में ही शीर्ष मुक्केबाजों से भिड़ना पड़ सकता है। निकहत इस बार पहली बार 51 किग्रा वर्ग में भाग लेंगी। इससे पहले उन्होंने 2022 में 52 किग्रा और 2023 में 50 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक जीते थे।

लवलीना 75 किग्रा भार वर्ग में अपना पदक बचाने उतरेंगी। भारत को पूजा रानी से भी अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। जैस्मीन लाम्बोरिया (57 किग्रा), साक्षी (54 किग्रा) और नुपुर श्योराण (80+ किग्रा), जिन्होंने कजाकिस्तान में विश्व मुक्केबाजी कप में स्वर्ण पदक जीते थे, भी वरीयता के साथ अपनी चुनौती पेश करेंगी।

पुरुष टीम में कई नए चेहरों को जगह दी गई है क्योंकि पिछले विश्व चैंपियनशिप के पदक विजेता — निशांत देव, दीपक भोरिया और मोहम्मद हुसामुद्दीन — इस बार हिस्सा नहीं ले रहे हैं।

टीम की अगुवाई चोट से उबर कर लौटे सुमित कुंडू कर रहे हैं। 2021 के विश्व युवा चैंपियन सचिन सिवाच और अनुभवी हर्ष चौधरी (86 किग्रा) के पास इस स्तर का अनुभव है।

इनके अलावा जदुमणि सिंह मंडेंगबाम (50 किग्रा), हितेश गुलिया (70 किग्रा) और अभिनाश जामवाल (65 किग्रा) जैसे प्रतिभाशाली मुक्केबाज भी भारतीय चुनौती को मजबूती देंगे। इस बार भारत की नजर न सिर्फ पदकों पर होगी, बल्कि अपने मुक्केबाजों को बड़े मंच पर आत्मविश्वास के साथ उतारने और भविष्य के लिए तैयार करने पर भी रहेगी।