चैंपियन की चिंता: लवलीना बोलीं- बिना सपोर्ट के कैसे करूं तैयारी?
ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन ने विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप के पहले ही दौर में हार के बाद अपनी निराशा जाहिर की है। उन्होंने बोला कि उन्हें अपनी तैयारी के लिए वह प्रशिक्षण अवसर नहीं मिल पा रहे हैं, जिसकी उन्हें वास्तव में जरूरत है।

टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता लवलीना ने एक साल से भी ज्यादा समय बाद किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में वापसी की, शनिवार को 75 किलोग्राम भार वर्ग के राउंड ऑफ 16 में तुर्की की बुसरा इस्लिदार से 0-5 से हारी। इस मैच में वह लय में नहीं दिखीं।
हार के बाद लवलीना ने एक्स पर अपनी पीड़ा साझा करते हुए लिखा, “एक साल बाद मैंने अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और पहले ही मैच में हार गई। यह बहुत तकलीफ देता है। मुझे दुख है कि मैं इस बार अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई। लेकिन सभी जानते हैं कि मैं कभी भी किसी विलासिता के लिए नहीं लड़ती, मैं सिर्फ बेहतर ट्रेनिंग की मांग करती हूं।”

27 वर्षीय मुक्केबाज़ ने टोक्यो ओलंपिक से पहले मिली तैयारियों और अब की स्थिति की तुलना करते हुए बोला कि इस बार उन्हें न तो पर्याप्त अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में हिस्सा लेने का मौका मिला और न ही जरूरी ट्रेनिंग कैंप्स का समर्थन। उन्होंने बोला, “टोक्यो से पहले हमारे पास अच्छे अंतरराष्ट्रीय कैंप होते थे।
मैं हमेशा अच्छे विदेशी स्पैरिंग पार्टनर की मांग करती रही हूं। लेकिन पेरिस ओलंपिक से पहले मुझे बहुत कम अवसर मिले।” लवलीना ने इस बात पर जोर दिया कि बिना गुणवत्ता वाले जोड़ीदारों के साथ ट्रेनिंग किए बिना वे खुद को कैसे बेहतर बना सकती हैं। “पेरिस ओलंपिक में भी मैं लगभग अकेली थी।
मुझे खुद को हर बार नए सिरे से साबित करना पड़ता है। लोग समझते हैं कि खेल में मानसिक ताकत भी उतनी ही जरूरी है जितनी शारीरिक ताकत। लेकिन फिर भी, देश के लिए सब कुछ देने के बावजूद, मुझे वह ट्रेनिंग या कोचिंग नहीं मिलती जो मुझे सच में चाहिए,” उन्होंने कहा।
उन्होंने सवाल किया, “क्या यह सही है कि मैं हमेशा चुप रहूं और सिर झुकाए, बिना उचित समर्थन के बस अपनी ट्रेनिंग करती रहूं?” लवलीना ने यह भी स्पष्ट किया कि वह मौजूदा कोचिंग स्टाफ की आलोचना नहीं कर रहीं। उन्होंने कहा कि टीम ने उनका समर्थन किया है, लेकिन नई चीज़ें सीखने के लिए समय और संसाधन दोनों की जरूरत होती है।
उन्होंने यह भी बताया कि इस साल उन्होंने अपने निजी कोच को राष्ट्रीय शिविर में शामिल करने और यूरोप में ट्रेनिंग का अनुरोध किया था, लेकिन ये अनुरोध अस्वीकार कर दिए गए।
लवलीना की ये भावनाएं देश में खेल अवसंरचना और खिलाड़ियों के लिए दी जा रही सुविधाओं पर एक गंभीर सवाल खड़ा करती हैं, खासकर जब वह ओलंपिक जैसी वैश्विक प्रतियोगिताओं में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हों।