दीपिका कुमारी फिर चूकीं, 15 वर्षीय गाथा खडके बनीं भारत की नई उम्मीद
भारत की अनुभवी और प्रतिष्ठित तीरंदाज दीपिका कुमारी एक बार फिर विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने से चूक गईं। गुरुवार को खेले गए मुकाबले में वह राउंड ऑफ 32 में इंडोनेशिया की दियानंदा चोइरुनिसा से पांच सेटों में 4-6 से हारकर बाहर हो गईं। यह छठा मौका है जब दीपिका विश्व चैंपियनशिप में पदक से दूर रहीं।

15 वर्षीय गाथा खडके ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश की एकमात्र रिकर्व तीरंदाज के रूप में प्री-क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई है। अब सबकी निगाहें शुक्रवार को होने वाले इस अहम मुकाबले पर होंगी, जहां गाथा का सामना पेरिस ओलंपिक चैंपियन और दुनिया की नंबर एक कोरियाई खिलाड़ी लिम सी-ह्योन से होगा।
22 वर्षीय लिम बेहतरीन फॉर्म में हैं और उन्होंने अपने पिछले मुकाबले में भारत की अंकिता भकत को दो सेट में छह परफेक्ट 10 के साथ 6-2 से हराया था। दीपिका की बात करें तो क्वालीफिकेशन में छठे स्थान पर रहने के बाद उनसे उम्मीदें थीं, लेकिन मुकाबले की शुरुआत से ही वह लय में नहीं दिखीं।
पहले सेट में उन्होंने 25 का स्कोर किया, जबकि दियानंदा ने 27 अंक बनाकर बढ़त ली। दीपिका ने दूसरा सेट जीतकर स्कोर बराबर किया, लेकिन तीसरे और चौथे सेट में इंडोनेशियाई खिलाड़ी ने बढ़त कायम रखी।
निर्णायक सेट में जब दबाव चरम पर था, तब दीपिका ने एक तीर आठ अंक पर मारा, जिससे स्कोर 27-27 रहा और दियानंदा ने मैच 6-4 से अपने नाम कर लिया। दीपिका का यह प्रदर्शन फिर साबित करता है कि बड़े मंच पर उनकी प्रतिष्ठा और परिणामों में बड़ा अंतर है।
इसके विपरीत, गाथा खडके ने अपनी उम्र को पीछे छोड़ते हुए असाधारण संयम और सटीकता दिखाई। क्वालीफाइंग में 666 अंक लेकर 14वीं वरीयता पाने वाली इस पुणे की खिलाड़ी ने पहले दौर में अजरबैजान की फातिमा हुसैनली को 7-1 से हराया। दूसरे दौर में उन्होंने ब्रिटेन की थिया रोजर्स को सीधे सेटों में 6-0 से मात दी।
गाथा की सबसे कठिन परीक्षा तीसरे दौर में जर्मनी की आठवीं वरीयता प्राप्त ओलंपियन मिशेल क्रॉपेन बाउर के खिलाफ थी। लेकिन दुनिया की 176वें स्थान पर मौजूद इस भारतीय किशोरी ने बिना घबराए 6-4 से मुकाबला जीत लिया।
स्कोर रहा – 28-26, 27-27, 27-28, 28-28, 28-27। गाथा ने इस साल की शुरुआत में राष्ट्रीय ट्रायल्स में 686 अंक बनाकर सबको चौंका दिया था, जो उस प्रतियोगिता में सबसे अधिक स्कोर था।
जुलाई में मैड्रिड विश्व कप में सीनियर स्तर पर पदार्पण करने के बाद उन्होंने प्री-क्वार्टर फाइनल में पहुंचकर पहले ही अपनी काबिलियत दिखा दी थी।
इस विश्व चैंपियनशिप में भारत ने पुरुष टीम में ऐतिहासिक स्वर्ण और मिश्रित टीम में रजत पदक जीता है, लेकिन ये दोनों ही कंपाउंड वर्ग में आए हैं। अब रिकर्व वर्ग में भारत की सारी उम्मीदें गाथा खडके पर टिकी हैं – यह देखना दिलचस्प होगा कि यह युवा तीरंदाज 2019 के डेन बॉश के बाद देश को रिकर्व में पहला पदक दिला पाएगी या नहीं।