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रिकर्व तीरंदाजी में भारत का पदक सूखा जारी, गाथा खडके प्री-क्वार्टर फाइनल में हारी

भारत की रिकर्व तीरंदाजी में विश्व चैंपियनशिप में पदक का इंतजार और बढ़ गया है, क्योंकि देश की अंतिम उम्मीद 15 वर्षीय गाथा खडके शुक्रवार को यहां प्री-क्वार्टर फाइनल में दुनिया की नंबर एक खिलाड़ी लिम सी-हियोन से हार गईं।

साभार : गूगल

गाथा को समझने का मौका भी नहीं मिला, क्योंकि पेरिस ओलंपिक की तिहरी स्वर्ण पदक विजेता कोरियाई खिलाड़ी ने घरेलू दर्शकों के सामने आसानी से 6-0 से यह मुकाबला जीत लिया।

भारत ने रिकर्व वर्ग में आखिरी बार 2019 में विश्व चैंपियनशिप में पदक जीता था, जब तरुणदीप राय, अतनु दास और प्रवीण जाधव की पुरुष टीम ने डेन बॉश में रजत पदक हासिल किया था। दूसरी बार किसी सीनियर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा ले रही गाथा को कोरियाई खिलाड़ी के सामने टिकने का मौका नहीं मिला।

लिम ने तीन परफेक्ट 10 के साथ शुरुआत की, जबकि गाथा ने दो 9 और एक 8 का जवाब दिया, जिससे पहला सेट 26-30 से हार गईं। इसके बाद भी गाथा अपनी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाईं और इस तरह भारतीय रिकर्व तीरंदाज लगातार तीसरी बार विश्व चैंपियनशिप से बिना पदक के लौटे।

दीपिका कुमारी का भी निराशाजनक प्रदर्शन रहा, जो पहले ही दौर में बाहर हो गईं। छह बार की विश्व चैंपियनशिप और चार बार की ओलंपियन दीपिका इंडोनेशिया की डायनांडा चोइरुनिसा से पांच सेटों में हार गईं। देश के शीर्ष रिकर्व तीरंदाज और ओलंपियन धीरज बोम्मादेवरा का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा।

क्वालीफिकेशन राउंड में खराब प्रदर्शन के बाद धीरज 39वें स्थान पर खिसक गए और टोक्यो ओलंपिक चैंपियन मेटे गाजोज के खिलाफ पहले मुकाबले में हारकर बाहर हो गए।

भारत को इस बार सिर्फ कम्पाउंड वर्ग में ही सफलता मिली, जिसमें ऋषभ यादव, प्रथमेश फुगे और अमन सैनी की टीम ने टीम स्पर्धा में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता। साथ ही, यादव ने ज्योति सुरेखा वेन्नम के साथ मिलकर मिश्रित टीम स्पर्धा में रजत पदक भी हासिल किया।