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दर्द को मात देकर लियो न्यूगेबाउर ने जीता स्वर्ण पदक

दर्द के बावजूद जर्मन धावक लियो न्यूगेबाउर ने डेकाथलॉन की अंतिम स्पर्धा में 1,500 मीटर दौड़ मंउ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। दौड़ पूरी करने के बाद न्यूगेबाउर ट्रैक पर ही लेट गए थे। 2024 ओलंपिक रजत पदक विजेता के हिलने-डुलने में असमर्थ होने पर अधिकारियों ने उनके लिए व्हीलचेयर निकाली।

साभार : गूगल

नेउगेबाउर ने खुद को फिर से खड़ा कर लिया। उन्होंने कहा, “मुझे पिछली दौड़ के बाद जितना बुरा लगा था, उतना पहले कभी नहीं लगा था, लेकिन मैं व्हीलचेयर पर ट्रैक नहीं छोड़ना चाहता था।”

4 मिनट 31.89 सेकंड के समय के साथ उन्होंने 8,804 अंक हासिल किए, जिससे उन्होंने प्यूर्टो रिको के आयडेन ओवेन्स-डेलेर्मे (8,784) और अमेरिकी काइल गारलैंड (8,703) को पीछे छोड़ा। पूर्व विश्व चैंपियन जर्मनी के निकलास कौल चौथे स्थान पर रहे। अपनी मां डायना और पिता टेरेंस को गले लगाने के लिए नेउगेबाउर स्टैंड पर चढ़ गए।

गोर्लिट्ज में जन्मे और स्टटगार्ट में पले-बढ़े, नेउगेबाउर एक खेल-प्रेमी परिवार में पले-बढ़े। उनके पिता, जो फुटबॉल के शौकीन थे, ने उन्हें एथलेटिक्स में हाथ आजमाने के लिए प्रोत्साहित किया।

15 साल की उम्र से वह ट्रैक और फील्ड पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इस फैसले के चलते उन्हें छात्रवृत्ति पर ऑस्टिन स्थित टेक्सास विश्वविद्यालय में दाखिला मिला, जहां वे प्रशिक्षण के साथ-साथ अर्थशास्त्र की पढ़ाई भी कर रहे हैं।

‘लियो द जर्मन’ उपनाम से मशहूर, 2.01 मीटर के इस एथलीट ने प्रतिभा और अथक परिश्रम के मेल के लिए अपनी ख्याति अर्जित की है। उनके कोच जिम गार्नहैम ने कहा, “मैं कुछ भी जादू नहीं करना चाहता, लेकिन अगर सब कुछ ठीक रहा, तो लियो वो कर सकता है जो कोई और नहीं कर सकता।”

विश्व खिताब जीतने के बाद, न्यूगेबाउर ने अपनी महत्वाकांक्षाओं को लेकर कोई संदेह नहीं छोड़ा। उन्होंने 2028 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक की ओर इशारा करते हुए बोला, ‘अभी और भी बहुत कुछ आना बाकी है।’ 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक को वह पहले से ही अपना घरेलू मैदान मानते हैं। न्यूगेबाउर अमेरिका में प्रशिक्षण ले रहे हैं।