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घरेलू क्रिकेट की अहमियत पर जोर, दिखा गौतम गंभीर की सख्ती का असर

भारतीय मुख्य कोच गौतम गंभीर और टीम मैनेजमेंट का जोर खिलाड़ियों के घरेलू क्रिकेट खेलने पर है। गंभीर नेशनल क्रिकेट एकेडमी में खिलाड़ियों की ट्रेनिंग से ज्यादा असल मैचों में अभ्यास को तरजीह दे रहे हैं।

उन्होंने दो टूक कहा भी है कि वह चाहते हैं कि नेशनल टीम में जगह बनाने या वापसी पर नजरें गड़ाए खिलाड़ी और रिजर्व टेस्ट क्रिकेटर रणजी ट्रॉफी में खेलें। उनकी इस सख्ती का असर साफ दिख रहा है।

रणजी के लिए तमाम अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की लाइन लग गई है। रविंद्र जडेजा, साई सुदर्शन, देवदत्त पड्डीकल, नारायण जगदीशन जो टीम इंडिया के टेस्ट प्लान का हिस्सा हैं लेकिन फिलहाल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ वनडे या टी20 सीरीज में नहीं हैं, उन्होंने रणजी ट्रॉफी का रुख कर लिया है।

साभार : गूगल

ऋषभ पंत के भी रणजी में खेलने की उम्मीद की जा रही है और वो भी तब जब दिल्ली की 24 सदस्यों वाली स्क्वाड में उनका नाम नहीं है। केएल राहुल, ध्रुव जुरेल, प्रसिद्ध कृष्णा भी वनडे सीरीज के बाद अपने-अपने राज्य की टीमों से रणजी में खेलते नजर आएंगे।

इससे अगले महीने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 2 टेस्ट मैच की होम सीरीज के लिए उन्हें अपनी तैयारियों को परखने का पर्याप्त मौका मिलेगा। संजू सैमसन भी रणजी में दिखेंगे।

गौतम गंभीर ने एक दिन पहले ही कहा था कि मैच अभ्यास का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम का कार्यक्रम काफी व्यस्त है क्योंकि भारत की टी20 टीम 9 नवंबर को ब्रिसबेन में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना आखिरी मैच खेलेगी और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहला टेस्ट 14 नवंबर को कोलकाता में शुरू होगा।

मुख्य कोच ने कहा, ‘‘कभी-कभी यह मुश्किल होता है लेकिन पेशेवरता इसी को कहते हैं। खिलाड़ियों को अपने दिनों का सर्वश्रेष्ठ तरीके से इस्तेमाल करने की कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि हम जानते हैं कि यहां से वन-डे क्रिकेट, फिर टी20 क्रिकेट और चार दिन बाद फिर टेस्ट मैच खेलना काफी मुश्किल है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जो खिलाड़ी केवल टेस्ट क्रिकेट का हिस्सा हैं, मुझे लगता है कि उनके लिए तैयारी करना और घरेलू क्रिकेट खेलना बहुत, बहुत महत्वपूर्ण है। सीओई में जाकर सिर्फ अपने कौशल पर काम करने के बजाय मुझे लगता है कि जितना ज्यादा वे टेस्ट मैचों के लिए खेलेंगे, वह टीम के लिए उतना ही फायदेमंद होगा।’’