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पैरालंपिक विजेता तीरंदाज शीतल देवी अब एशिया कप में दिखाएंगी दम

भुजाहीन पैरा तीरंदाज शीतल देवी ने अपनी कड़ी मेहनत और निरंतर प्रयासों के बल पर एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल किया है। उन्होंने जेद्दा में होने वाले आगामी एशिया कप के तीसरे चरण के लिए भारतीय जूनियर तीरंदाजी टीम में अपनी जगह पक्की की।

यह उपलब्धि उनके लिए एक खास मायने रखती है, क्योंकि इस ने केवल उनके आत्मविश्वास को और बढ़ाया है, बल्कि यह भी साबित किया है कि जब इरादा मजबूत हो तो किसी भी स्थिति को चुनौती दी जा सकती है। शीतल देवी, जिन्होंने पहले पेरिस पैरालंपिक 2024 में मिश्रित टीम कंपाउंड स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था, ने एक बार फिर से खुद को साबित किया।

टीम की घोषणा के बाद शीतल ने सोशल मीडिया पर अपनी खुशी और यात्रा के बारे में साझा करते हुए लिखा, “जब मैंने शुरुआत की थी, तो मेरा एक छोटा सा सपना था कि एक दिन सक्षम तीरंदाजों के साथ प्रतिस्पर्धा करूंगी।

Sheetal Devi (@sheetal_archery)

शुरुआत में मुझे कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन हर असफलता से मैंने कुछ न कुछ सीखा। आज वह सपना और करीब आ गया है।” शीतल देवी के लिए प्रेरणा का स्रोत पेरिस पैरालंपिक चैंपियन ओजनूर क्यूर गिर्डी रही हैं, जो खुद भी सक्षम तीरंदाजों के मुकाबलों में भाग लेती हैं।

शीतल ने खुद को साबित करने की यात्रा में ओजनूर से प्रेरित होकर, अपने रास्ते पर चलने की ठानी। उनका यह संघर्ष और सफलता न सिर्फ भारत, बल्कि वैश्विक तीरंदाजी समुदाय के लिए एक प्रेरणा है।

60 से अधिक सक्षम तीरंदाजों के बीच प्रतिस्पर्धा करते हुए शीतल ने जम्मू-कश्मीर से सोनीपत में आयोजित चार दिवसीय राष्ट्रीय चयन ट्रायल में तीसरा स्थान प्राप्त किया।

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शीतल ने क्वालीफिकेशन दौर में 703 अंक हासिल किए, जिसमें पहले दौर में 352 और दूसरे दौर में 351 अंक थे, जो शीर्ष क्वालीफायर तेजल साल्वे के कुल अंक के बराबर थे।

फाइनल रैंकिंग में तेजल साल्वे (15.75 अंक) और वैदेही जाधव (15 अंक) ने क्रमशः पहले और दूसरे स्थान पर कब्जा किया, जबकि शीतल ने 11.75 अंक के साथ तीसरा स्थान हासिल किया। वह महाराष्ट्र की ज्ञानेश्वरी गडाधे को 0.25 अंक के मामूली अंतर से पछाड़ते हुए इस मुकाम तक पहुंचीं।

शीतल देवी की यह सफलता साबित करती है कि जीवन की परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, अगर इच्छाशक्ति मजबूत हो तो किसी भी लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

उनके संघर्ष और मेहनत ने उन्हें एक बार फिर से भारतीय तीरंदाजी में अपनी एक अलग पहचान दिलाई है, और अब वह एशिया कप में अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन से देश का नाम रोशन करने के लिए तैयार हैं।

यह सिर्फ शीतल के लिए एक व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि उन सभी के लिए एक प्रेरणा है जो जीवन में किसी न किसी कठिनाई से जूझ रहे हैं। शीतल की यह यात्रा यह संदेश देती है कि मुश्किलों का सामना करके भी सफलता को गले लगाया जा सकता है।

टीमें 

रिकर्व 

पुरुष : रामपाल चौधरी, रोहित कुमार, मयंक कुमार

महिला: कोंडापावुलुरी युक्ता श्री, वैष्णवी कुलकर्णी, कृतिका बिचपुरिया

कंपाउंड 

पुरुष : प्रद्युमन यादव, वासु यादव, देवांश सिंह

महिला : तेजल साल्वे, वैदेही जाधव, शीतल देवी