अस्थिरता का साल : 2025 में भारतीय फुटबॉल की खोती दिशा
2025 भारतीय फुटबॉल के इतिहास में एक ऐसे साल के रूप में दर्ज होगा, जिसमें मैदान के भीतर और बाहर दोनों जगह अस्थिरता हावी रही।
प्रशासनिक अव्यवस्था, अदालतों की दहलीज़ पर लंबित मामले, वित्तीय अनिश्चितता, घरेलू लीग का ठप पड़ना और सीनियर पुरुष टीम का कमजोर प्रदर्शन—इन सबने मिलकर खेल को गहरे संकट में धकेल दिया।
साल के आखिरी चरण में लियोनेल मेस्सी के बहुचर्चित ‘जीओएटी इंडिया टूर’ ने भले ही फुटबॉल को सुर्खियों में ला दिया, लेकिन इससे भारतीय फुटबॉल की जमीनी समस्याओं को कोई ठोस राहत नहीं मिल सकी।
उलटे, कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में दौरे के पहले दिन फैली अराजकता और अव्यवस्था ने खेल की छवि को और नुकसान पहुँचाया।
हालांकि भारतीय फुटबॉल के गढ़ माने जाने वाले इस शहर में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ना चिंता का विषय रहा, लेकिन हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली में मेस्सी से जुड़े कार्यक्रम अपेक्षाकृत बेहतर ढंग से आयोजित किए गए।
मैदान पर नजर डालें तो भारतीय सीनियर पुरुष टीम के लिए यह साल बेहद निराशाजनक रहा। नवंबर में ढाका में खेले गए 2027 एएफसी एशियाई कप क्वालीफाइंग मैच में बांग्लादेश से मिली हार ने इतिहास बदल दिया—यह पिछले 22 वर्षों में बांग्लादेश के खिलाफ भारत की पहली पराजय थी।
यह भी सच है कि 2024 में एक भी अंतरराष्ट्रीय जीत दर्ज न कर पाने वाली भारतीय टीम ने 2025 में कुछ सफलताएँ हासिल कीं। सितंबर में ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान में आयोजित सीएएफए नेशंस कप में कांस्य पदक जीतना उनमें सबसे उल्लेखनीय रहा।
इसके बावजूद, निर्णायक मुकाबलों में अपेक्षित प्रदर्शन न कर पाने के कारण भारत 2011 के बाद पहली बार एशियाई कप के लिए क्वालीफाई नहीं कर सका, जिससे फीफा रैंकिंग में भी गिरावट आई।
स्थिति तब और चिंताजनक हो गई जब भारतीय टीम को बांग्लादेश के अलावा हांगकांग और सिंगापुर जैसी कम रैंकिंग वाली टीमों से भी हार झेलनी पड़ी। सिंगापुर के खिलाफ 1-2 की हार ने एशियाई कप में जगह बनाने की उम्मीदों पर पूरी तरह पानी फेर दिया।
मैदान के बाहर हालात और भी जटिल रहे। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ और रिलायंस के स्वामित्व वाली फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड के बीच इंडियन सुपर लीग को लेकर किया गया अनुबंध आठ दिसंबर को समाप्त हो गया।
इसके बाद एआईएफएफ किसी नए वाणिज्यिक भागीदार को जोड़ने में विफल रहा, जिसका सीधा असर देश की सर्वोच्च घरेलू लीग पर पड़ा। परिणामस्वरूप, आईएसएल अब तक शुरू नहीं हो सकी है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में यह लीग तीन महीने पहले ही आरंभ हो जाया करती थी।
प्रायोजक पीछे हट रहे हैं, क्लबों ने अपने संचालन रोक दिए हैं और खिलाड़ी अनिश्चित भविष्य के साए में हैं। तमाम हितधारकों से समाधान की गुहार लगाने के बावजूद घरेलू फुटबॉल लीग का भविष्य गंभीर संदेह के घेरे में है।
संकट की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष भर उच्चतम न्यायालय में लगातार सुनवाई चलती रही और केंद्रीय खेल मंत्रालय को हस्तक्षेप करना पड़ा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी सभी हितधारकों से देश में फुटबॉल के विकास के लिए एकजुट होकर काम करने की अपील की।
इन तमाम निराशाजनक घटनाओं के बीच, महिला और जूनियर टीमों का प्रदर्शन राहत की किरण बनकर उभरा।
जुलाई में थाईलैंड के चियांग माई में भारतीय महिला टीम ने एएफसी महिला एशियाई कप 2026 के लिए सीधे क्वालीफाई कर इतिहास रच दिया। यह पहला मौका था जब भारतीय महिला टीम ने इस प्रतियोगिता के लिए क्वालीफिकेशन हासिल किया।
भारतीय महिला लीग की मौजूदा चैंपियन ईस्ट बंगाल एफसी ने एएफसी महिला चैंपियंस लीग में मुख्य ड्रॉ का मैच जीतकर देश को एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दिलाई।
जूनियर स्तर पर भी उम्मीदें मजबूत हुईं। श्रीलंका में आयोजित एसएएफएएफ अंडर-17 चैंपियनशिप में भारतीय टीम ने फाइनल में बांग्लादेश को पेनल्टी शूटआउट में हराकर अपना सातवां खिताब जीता।