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कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का लखनऊ दौरा

फल निर्यातकों के साथ अहम बैठक, यूपी के किसानों की आय दोगुनी करने का खाका तैयार

लखनऊ (एग्रीकल्चर एवं स्टेट डेस्क): उत्तर प्रदेश को भारत का ‘बागवानी और कृषि हब’ (Horticulture Hub) बनाने के मिशन को रफ्तार देने के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान आज राजधानी लखनऊ के दौरे पर हैं। उन्होंने ‘फ्रूट होराइजन 2026’ (Fruit Horizon 2026) नामक एक वृहद कार्यक्रम में हिस्सा लिया और राज्य के प्रमुख फल उत्पादक किसानों तथा बड़े निर्यातकों के साथ एक उच्च स्तरीय और बेहद अहम बैठक की। इस बैठक का मुख्य एजेंडा उत्तर प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध फलों—जैसे मलीहाबादी दशहरी आम, इलाहाबादी अमरूद और केले—के अंतरराष्ट्रीय निर्यात (Export) को बढ़ावा देना और स्थानीय किसानों की आमदनी को दोगुना करने के लक्ष्य को जमीन पर उतारना था।

आपूर्ति श्रृंखला और कोल्ड स्टोरेज पर सरकार का जोर
बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश के फलों में वैश्विक बाजार पर राज करने की पूरी क्षमता है, लेकिन बुनियादी ढांचे (Infrastructure) की कमी के कारण किसान इसका पूरा लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए उन्होंने राज्य में ‘कोल्ड चेन नेटवर्क’ (Cold Chain Network) और आधुनिक पैकेजिंग हाउसों का जाल बिछाने की बड़ी घोषणा की। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि फल एक जल्दी खराब होने वाली उपज (Perishable item) है, इसलिए खेत से लेकर हवाई अड्डे या बंदरगाह तक एक निर्बाध ‘सप्लाई चेन’ सुनिश्चित करना केंद्र और राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए सरकार निर्यातकों और सहकारी समितियों को भारी सब्सिडी प्रदान कर रही है।

अंतरराष्ट्रीय मानकों और कीटनाशकों के प्रयोग पर मंथन
निर्यातकों ने मंत्री के सामने यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों (Gulf Countries) में भारतीय फलों के निर्यात में आने वाली सबसे बड़ी बाधा—फाइटो-सैनिटरी मानकों (Phyto-sanitary standards) और कीटनाशकों के अवशेषों (Pesticide residue)—का मुद्दा उठाया। अक्सर इन कड़े अंतरराष्ट्रीय मानकों के कारण फलों की खेप विदेशी बंदरगाहों से वापस कर दी जाती है। कृषि मंत्री ने इस चिंता को दूर करते हुए आश्वस्त किया कि सरकार ‘एपीडा’ (APEDA) के साथ मिलकर किसानों के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित करेगी। इन शिविरों में किसानों को जैविक खेती (Organic Farming) और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुरक्षित रसायनों के उपयोग की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि यूपी का आम और अमरूद बिना किसी रुकावट के विदेशी बाजारों में अपनी मिठास घोल सके।

किसानों को बिचौलियों से मिलेगी मुक्ति
शिवराज सिंह चौहान ने ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना के तहत बागवानी फसलों को मिलने वाले प्रोत्साहन की भी जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार अब ऐसी व्यवस्था बना रही है जिससे फल उत्पादक किसान सीधे निर्यातकों या अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जुड़ सकें, जिससे बिचौलियों का खेल पूरी तरह खत्म हो जाएगा और किसान को उसकी उपज का सीधा और असली दाम मिल सकेगा।

केंद्रीय कृषि मंत्री का यह लखनऊ दौरा उत्तर प्रदेश के लाखों किसानों के लिए एक बड़ी उम्मीद लेकर आया है। फल निर्यातकों के साथ हुई इस सीधी बातचीत ने सरकार और स्टेकहोल्डर्स के बीच की खाई को पाटने का काम किया है। यदि बैठक में तय किए गए रोडमैप पर तेजी से काम होता है, तो वह दिन दूर नहीं जब उत्तर प्रदेश भारत का सबसे बड़ा ‘फल निर्यातक राज्य’ बनकर वैश्विक पटल पर छा जाएगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा।