भारत और नीदरलैंड के कूटनीतिक संबंधों में नया अध्याय
द्विपक्षीय संबंध 'रणनीतिक साझेदारी' के स्तर पर उन्नत

यूरोपीय महाद्वीप में भारत की कूटनीतिक और आर्थिक स्थिति दिनों-दिन सुदृढ़ हो रही है। इस बढ़ती शक्ति का एक जीवंत प्रमाण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया नीदरलैंड यात्रा के दौरान देखने को मिला है। इस यात्रा के दौरान एक अत्यंत महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक विकास में, भारत और नीदरलैंड के नेतृत्व ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य स्तर से उठाकर ‘रणनीतिक साझेदारी’ (Strategic Partnership) के स्तर पर उन्नत करने की आधिकारिक घोषणा की है। यह घोषणा न केवल दोनों देशों के बीच गहरे होते विश्वास का प्रतीक है, बल्कि यह यूरोप में नीदरलैंड को भारत के एक प्रमुख ‘प्रवेश द्वार’ (Gateway to Europe) के रूप में भी स्थापित करती है।
‘रणनीतिक साझेदारी’ का अर्थ और महत्व:
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में ‘रणनीतिक साझेदारी’ शब्द का प्रयोग हल्के में नहीं किया जाता। इसका अर्थ है कि दोनों देश अब केवल व्यापारिक लेन-देन तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि वे दीर्घकालिक भू-राजनीतिक, सुरक्षा, तकनीकी और वैश्विक हितों में एक-दूसरे के साथ खड़े होंगे। नीदरलैंड पहले से ही भारत में तीसरा सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) करने वाला देश है। इस साझेदारी के बाद दोनों देशों के बीच उच्च-स्तरीय राजनीतिक संवाद, सैन्य सहयोग और खुफिया जानकारी साझा करने के तंत्र में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।
जल प्रबंधन और कृषि क्षेत्र में सहयोग:
नीदरलैंड दुनिया के उन गिने-चुने देशों में से एक है जिसने जल प्रबंधन (Water Management) और बाढ़ नियंत्रण की अचूक तकनीकें विकसित की हैं, क्योंकि उस देश का एक बड़ा हिस्सा समुद्र तल से नीचे स्थित है। भारत, जो हर वर्ष बाढ़ और सूखे की दोहरी मार झेलता है, के लिए नीदरलैंड की यह विशेषज्ञता किसी वरदान से कम नहीं है। ‘रणनीतिक साझेदारी’ के तहत भारत की नदी जोड़ो परियोजनाओं, गंगा सफाई अभियान और तटीय सुरक्षा के लिए डच तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सीमित भूमि में उच्च गुणवत्ता वाली कृषि उपज (Precision Agriculture) और खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में नीदरलैंड की तकनीक भारतीय किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य में सहायक सिद्ध होगी।
समुद्री सुरक्षा और हिन्द-प्रशांत विमर्श:
नीदरलैंड एक प्रमुख समुद्री शक्ति है और वैश्विक व्यापार में उसके रोटरडैम बंदरगाह की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिन्द-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) के लिए भारत के दृष्टिकोण का नीदरलैंड ने पूर्ण समर्थन किया है। इस साझेदारी के अंतर्गत दोनों देश समुद्री डकैती रोकने, समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर संयुक्त रूप से कार्य करेंगे।
भारत और नीदरलैंड के संबंधों का यह उन्नयन दोनों देशों के परिपक्व होते कूटनीतिक दृष्टिकोण का परिणाम है। जल, कृषि, तकनीक और सुरक्षा जैसे चार प्रमुख स्तंभों पर टिकी यह ‘रणनीतिक साझेदारी’ आने वाले दशकों में दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को तो बल देगी ही, साथ ही यूरोपीय संघ (EU) के भीतर भारत के एक मजबूत और विश्वसनीय मित्र के रूप में नीदरलैंड की भूमिका को भी स्थायी बनाएगी।