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यूपी में भीषण गर्मी के बीच ऊर्जा मंत्री का ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ एक्शन

अघोषित बिजली कटौती पर उपकेंद्र के अभियंताओं पर गिरेगी सीधे गाज

उत्तर प्रदेश इस समय प्रकृति के सबसे रौद्र रूप, यानी भयंकर लू (Heatwave) और भीषण गर्मी की चपेट में है। राज्य के अधिकांश जिलों में पारा 44 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच झूल रहा है। ऐसे झुलसा देने वाले मौसम में आम जनता के लिए बिजली ही एकमात्र सहारा होती है, लेकिन कई अंचलों से आ रही अघोषित बिजली कटौती (Undeclared Power Cuts) की शिकायतों ने जनजीवन को बेहाल कर दिया है। स्थिति की गंभीरता और जनता के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार के ऊर्जा मंत्री ने एक अत्यंत सख्त और कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने बिजली विभाग के आला अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि यदि किसी भी क्षेत्र में अघोषित या मनमानी बिजली कटौती हुई, तो सीधे तौर पर संबंधित उपकेंद्र (Sub-station) के अभियंताओं (Engineers) पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

बढ़ती मांग और चरमराता बुनियादी ढांचा:
उत्तर प्रदेश भारत का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है। भीषण गर्मी के कारण एयर कंडीशनर (AC), कूलर, पंखे और कृषि कार्यों के लिए नलकूपों (Tube-wells) का उपयोग चरम पर है। इसके परिणामस्वरूप, राज्य में बिजली की मांग (Peak Power Demand) अपने ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गई है। सरकार का दावा है कि राज्य के पास पर्याप्त बिजली उपलब्ध है, लेकिन असली समस्या स्थानीय वितरण ढांचे (Distribution Infrastructure) की है।

अत्यधिक लोड (Overload) के कारण ट्रांसफार्मर फुंकने, तार टूटने और लोकल फॉल्ट (Local Fault) की घटनाएं बढ़ गई हैं। कई बार स्थानीय कर्मचारी इन फॉल्ट को सुधारने में घंटों लगा देते हैं, और इसे ‘अघोषित कटौती’ का नाम देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेते हैं। इसी प्रशासनिक लापरवाही पर ऊर्जा मंत्री ने सर्जिकल स्ट्राइक करने का मन बनाया है।

मंत्री के निर्देश: जवाबदेही और ‘ज़ीरो टॉलरेंस’:
ऊर्जा मंत्री ने सभी बिजली वितरण निगमों (Discoms) के प्रबंध निदेशकों (MDs), मुख्य अभियंताओं और अधीक्षण अभियंताओं के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। उन्होंने स्पष्ट किया कि रोस्टर के अनुसार (Scheduled) बिजली आपूर्ति हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए।

निर्देशों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

स्थानीय जवाबदेही: अगर ट्रांसफार्मर जलता है या कोई फॉल्ट आता है, तो तय समय-सीमा के भीतर उसे बदलना या ठीक करना जूनियर इंजीनियर (JE) और सब-डिविजनल ऑफिसर (SDO) की निजी जिम्मेदारी होगी।

कंट्रोल रूम की सक्रियता: शिकायतों के निस्तारण के लिए 1912 टोल-फ्री नंबर को और अधिक सक्रिय किया जाए। जनता के फोन न उठाने वाले अधिकारियों को निलंबित किया जाएगा।

गश्त और मॉनिटरिंग: रात के समय होने वाली अघोषित कटौती को रोकने के लिए वरिष्ठ अधिकारी स्वयं पेट्रोलिंग (Night Patrolling) करेंगे और उपकेंद्रों का औचक निरीक्षण करेंगे।

जनता को राहत और व्यवस्था में सुधार की उम्मीद:
गर्मी के कारण होने वाली बिजली कटौती केवल पसीने और असुविधा का कारण नहीं है, बल्कि यह पेयजल संकट (Water Crisis) और स्वास्थ्य आपातकाल को भी जन्म देती है। अस्पतालों में मरीजों का बुरा हाल हो जाता है और छात्रों की पढ़ाई बाधित होती है। ऊर्जा मंत्री के इस कड़े निर्देश के बाद बिजली विभाग के कर्मचारियों में हड़कंप मचा हुआ है।

उत्तर प्रदेश सरकार का यह आदेश प्रशासनिक जवाबदेही (Administrative Accountability) तय करने की दिशा में एक स्वागत योग्य कदम है। केवल ऊपर से बिजली खरीद लेना पर्याप्त नहीं है, जब तक वह अंतिम उपभोक्ता के मीटर तक निर्बाध रूप से न पहुंचे। ऊर्जा मंत्री की यह सख्ती यदि धरातल पर ईमानदारी से लागू होती है, तो इस जानलेवा गर्मी में झुलसती उत्तर प्रदेश की जनता को एक बड़ी और वास्तविक राहत मिलेगी।