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राष्ट्रीय शिक्षा नीति में ऐतिहासिक बदलाव: स्कूल और कॉलेज पाठ्यक्रम का नया स्वरूप

देश की शिक्षा व्यवस्था को २१वीं सदी की आवश्यकताओं और वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने के लिए नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत कई ऐतिहासिक और दूरगामी बदलावों की घोषणा की गई है। यह नया पाठ्यक्रम रटने की पुरानी पद्धति (रट्टा मार पढ़ाई) को समाप्त कर, छात्रों के समग्र विकास, तार्किक क्षमता और कौशल निर्माण पर केंद्रित है।

स्कूली शिक्षा में क्रांतिकारी परिवर्तन
नए पाठ्यक्रम के अंतर्गत, स्कूली शिक्षा के ढांचे को पूरी तरह से नया रूप दिया गया है। अब छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जाएगा। प्रारंभिक कक्षाओं में मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा देने पर विशेष बल दिया गया है, ताकि बच्चे विषय को गहराई से समझ सकें। मिडिल स्कूल स्तर से ही व्यावसायिक प्रशिक्षण (वोकेशनल ट्रेनिंग) और कोडिंग जैसी आधुनिक विधाओं को पाठ्यक्रम का अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है। अब रिपोर्ट कार्ड केवल अंकों का दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि इसमें छात्र के मानसिक, शारीरिक और रचनात्मक विकास का संपूर्ण विवरण होगा।

उच्च शिक्षा में बहु-विषयक दृष्टिकोण (Multidisciplinary Approach)
कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर छात्रों को विषयों के चयन में अभूतपूर्व स्वतंत्रता दी गई है। अब विज्ञान का छात्र अपनी रुचि के अनुसार कला या संगीत का विषय भी चुन सकता है। इसके अलावा, ‘मल्टीपल एंट्री और एग्जिट’ (Multiple Entry and Exit) प्रणाली लागू की गई है, जिसके तहत यदि कोई छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ता है, तो उसकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी और उसे उस स्तर तक का प्रमाणपत्र या डिप्लोमा प्रदान किया जाएगा।

भविष्य का निर्माण
यह शैक्षिक सुधार देश के युवाओं को केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला (उद्यमी) बनाने के दर्शन पर आधारित है। नया पाठ्यक्रम छात्रों में आलोचनात्मक सोच (क्रिटिकल थिंकिंग), रचनात्मकता और मानवीय मूल्यों को विकसित करेगा, जो उन्हें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए मानसिक और बौद्धिक रूप से पूरी तरह तैयार करेगा।