पश्चिमी एशिया संकट का भारत पर असर
200 से अधिक रसायनों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देगी सरकार

मध्य पूर्व (पश्चिमी एशिया) में लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की स्थिति ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बुरी तरह बाधित कर दिया है। इस गंभीर संकट को एक बड़े अवसर में बदलते हुए और विदेशी निर्भरता खत्म करने के लिए, भारत सरकार ने 200 से अधिक प्रमुख रसायनों का स्वदेशी उत्पादन युद्ध स्तर पर बढ़ाने की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
वैश्विक राजनीति में जब भी उथल-पुथल होती है, तो इसका सीधा असर देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ता है। वर्तमान में मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष और लाल सागर में व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों के कारण दुनिया भर में माल ढुलाई (Freight) और आपूर्ति व्यवस्था चरमरा गई है। इस स्थिति से भारतीय उद्योगों को बचाने के लिए भारत सरकार ने आयात पर निर्भरता कम करने का एक बड़ा और रणनीतिक फैसला लिया है।
200 प्रमुख रसायनों की हुई पहचान
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने उच्च स्तरीय बैठकों के बाद उन 200 से अधिक रसायनों (केमिकल्स) की एक विस्तृत सूची तैयार की है, जिनके लिए भारत अभी तक भारी मात्रा में आयात पर निर्भर था। इन रसायनों में मुख्य रूप से कृषि क्षेत्र में उपयोग होने वाले उर्वरक (फर्टिलाइजर), फार्मास्युटिकल उद्योग में काम आने वाली सक्रिय दवा सामग्री (API), और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) तथा कपड़ा उद्योग के लिए आवश्यक पेट्रोकेमिकल्स शामिल हैं। मध्य पूर्व संकट के कारण इनकी आपूर्ति में देरी हो रही थी और कीमतें लगातार आसमान छू रही थीं।
‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगी नई गति
सरकार की यह नई रणनीति ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान का एक अहम हिस्सा है। इन 200 रसायनों के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई बड़े कदम उठाने जा रही है। उद्योगों को भूमि आवंटन में छूट, करों (टैक्स) में राहत और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान करने का खाका तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय रसायन उद्योग (केमिकल इंडस्ट्री) को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करना है।
चीन और पश्चिमी देशों के विकल्प के रूप में भारत
यह संकट भारतीय रसायन क्षेत्र के लिए एक स्वर्णिम अवसर लेकर आया है। दुनिया भर की बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब चीन और अस्थिर मध्य पूर्व के अलावा ‘चाइना प्लस वन’ (China Plus One) नीति के तहत एक सुरक्षित और विश्वसनीय विकल्प तलाश रही हैं। यदि भारत इन प्रमुख रसायनों का उत्पादन स्वदेशी स्तर पर बढ़ा लेता है, तो न केवल हमारी घरेलू मांग पूरी होगी, बल्कि भारत दुनिया के लिए एक बड़ा निर्यातक केंद्र (Export Hub) भी बन सकता है।
लाखों नए रोज़गार का होगा सृजन
इस रणनीति का सबसे बड़ा लाभ देश के युवाओं और कार्यबल को मिलेगा। देश भर में नए केमिकल प्लांट, रिफाइनरी और औद्योगिक इकाइयां स्थापित होने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों नए रोज़गार पैदा होंगे। यह पहल साबित करती है कि भारत अब किसी भी वैश्विक संकट के सामने झुकने के बजाय, अपनी तकनीकी क्षमता और औद्योगिक शक्ति से उसका समाधान निकालने में सक्षम है।