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राजस्थान शिक्षक भर्ती परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा

राजस्थान में सरकारी परीक्षाओं को पारदर्शी बनाने के दावों के बीच एक बार फिर ‘मुन्नाभाई’ गिरोह की सक्रियता सामने आई है। राज्य में आयोजित शिक्षक भर्ती परीक्षा (टीचर रिक्रूटमेंट एग्जाम 2026) में एक असली परीक्षार्थी की जगह बैठकर पेपर सॉल्व कर रहे एक ‘डमी कैंडिडेट’ को विशेष जांच दल (SIT) ने रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। इस खुलासे के बाद परीक्षा बोर्ड में हड़कंप मच गया है।

राजस्थान में नकल माफिया और परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोहों पर नकेल कसने के लिए बनाई गई विशेष जांच दल (SIT) को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। जयपुर के आदर्श विद्या मंदिर परीक्षा केंद्र पर रविवार को आयोजित तीसरी श्रेणी की शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान एक ऐसा शातिर मुन्नाभाई पकड़ा गया है, जो किसी और के नाम पर सरकारी नौकरी पाने का पेपर दे रहा था।

बायोमेट्रिक (Biometric) और एआई (AI) तकनीक ने खोला राज
इस बार परीक्षा बोर्ड ने नकल रोकने के लिए कड़े इंतजाम किए थे। परीक्षा केंद्र पर प्रवेश से पहले हर अभ्यर्थी के चेहरे का मिलान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कैमरों और अंगूठे के निशान (बायोमेट्रिक) से किया जा रहा था। जब परीक्षा कक्ष संख्या 12 में बैठे एक परीक्षार्थी के अंगूठे का निशान डेटाबेस से मेल नहीं खाया, तो पर्यवेक्षक को शक हुआ। तुरंत फ्लाइंग स्क्वाड और एसआईटी (SIT) की टीम को बुलाया गया। गहन पूछताछ में युवक टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

5 लाख रुपये में हुआ था सौदा
पुलिस पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम मनीष कुमार (काल्पनिक नाम) बताया, जो एक मेधावी छात्र है और पैसों के लालच में यह अपराध कर रहा था। मनीष असली परीक्षार्थी विक्रम सिंह की जगह परीक्षा दे रहा था। जांच में सामने आया है कि विक्रम सिंह ने परीक्षा पास कराने के लिए एक कोचिंग सेंटर चलाने वाले गिरोह को 10 लाख रुपये दिए थे। उस गिरोह ने 5 लाख रुपये मनीष को देकर डमी कैंडिडेट के रूप में परीक्षा केंद्र भेजा था। मनीष ने फर्जी आधार कार्ड और प्रवेश पत्र पर अपनी फोटो लगाकर इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया।

असली परीक्षार्थी पर भी कड़ा एक्शन
एसआईटी (SIT) ने फर्जी परीक्षार्थी मनीष को तुरंत गिरफ्तार कर उसके खिलाफ धोखाधड़ी (420), कूट रचना (फर्जी कागजात बनाने) और राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है। वहीं, असली परीक्षार्थी विक्रम सिंह को परीक्षा बोर्ड ने आजीवन (Life-time) परीक्षा देने से वंचित (Debar) कर दिया है और उसकी गिरफ्तारी के लिए भी टीमें रवाना कर दी गई हैं।

गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश तेज़
पुलिस अब उस कोचिंग संचालक और मास्टरमाइंड की तलाश कर रही है जिसने यह पूरा सौदा तय किया था। राज्य के शिक्षा मंत्री ने इस त्वरित कार्रवाई के लिए पुलिस और एसआईटी की सराहना की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि राजस्थान में युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी गिरोह को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों की संपत्ति कुर्क करने तक की कार्रवाई की जाएगी।