आगामी पर्व को लेकर राज्यों की सख्त गाइडलाइन
पशु वध पर नए नियम लागू, कुछ विशेष जानवरों की कुर्बानी पर पूर्ण प्रतिबंध

आगामी त्योहार (बकरीद) को शांतिपूर्ण और कानूनी दायरे में संपन्न कराने के लिए देश के कई राज्यों ने पशु वध और कुर्बानी को लेकर बेहद सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि सार्वजनिक स्थानों पर पशु वध, प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी और अवशेषों को खुले में फेंकने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन को सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ भी सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
त्योहारों के मौसम में कानून-व्यवस्था, सांप्रदायिक सौहार्द और स्वच्छता बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। आगामी बकरीद (ईद-उल-अज़हा) पर्व को देखते हुए, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात सहित कई राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (DGP) और गृह विभागों ने एक विस्तृत और सख्त ‘स्टैंडिंग ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOP) जारी की है। प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि धार्मिक स्वतंत्रता के नाम पर कानून का उल्लंघन किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
किन जानवरों की कुर्बानी पर है पूर्ण प्रतिबंध?
सबसे अहम दिशा-निर्देश गोवंश की सुरक्षा को लेकर है। भारत के अधिकांश राज्यों में ‘गोवंश हत्या निषेध अधिनियम’ (Prevention of Cow Slaughter Act) लागू है। राज्यों ने साफ किया है कि गाय, बैल, बछड़ा और ऊंट जैसे जानवरों की कुर्बानी पर पूरी तरह से कानूनी प्रतिबंध (Ban) है।
यदि कोई व्यक्ति इन प्रतिबंधित जानवरों का वध करता है, तो उसके खिलाफ गोवंश वध निवारण अधिनियम (Prevention of Cow Slaughter Act) और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 (Prevention of Cruelty to Animals Act, 1960) के तहत गैर-जमानती धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
कई राज्यों में इसके लिए न्यूनतम 3 साल से लेकर 10 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
इसके अलावा, यदि इस कृत्य से इलाके का सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ता है, तो आरोपी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) या गैंगस्टर एक्ट जैसी कठोर कार्रवाई भी की जा सकती है।
सार्वजनिक स्थानों पर वध करने पर होगी जेल
नए दिशा-निर्देशों में वध के स्थान (Place of Slaughter) को लेकर भी कड़े नियम बनाए गए हैं। अब कोई भी व्यक्ति सड़कों, गलियों, पार्कों, चौराहों या किसी भी सार्वजनिक स्थान पर कुर्बानी नहीं दे सकता।
कुर्बानी केवल निजी परिसरों, घरों के अंदर (चारदीवारी के भीतर) या प्रशासन द्वारा पहले से निर्धारित और चिन्हित किए गए बूचड़खानों (Slaughterhouses) में ही दी जा सकती है।
खुले में कुर्बानी देने पर भारतीय दंड संहिता (IPC/BNS) की धारा 268 (सार्वजनिक उपद्रव) और धारा 269 (लापरवाही से बीमारी फैलाना) के तहत तुरंत गिरफ्तारी की जाएगी।
अवशेषों का निस्तारण और स्वच्छता के नियम
पर्यावरण और जन स्वास्थ्य (Public Health) को ध्यान में रखते हुए, पशुओं के रक्त और अवशेषों को नालियों, नदियों या खुले मैदानों में फेंकने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
नगर निगमों और स्थानीय निकायों को निर्देश दिए गए हैं कि वे वार्ड स्तर पर गहरे गड्ढे (Deep Trenches) खुदवाएं, जहाँ अवशेषों को वैज्ञानिक तरीके से दफनाया जा सके।
घरों में भी लोगों को अवशेषों को काले रंग के पॉलीथीन बैग में बंद करके नगर निगम की कचरा गाड़ियों (Solid Waste Management Vehicles) को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। नियम तोड़ने वालों पर नगर निगम भारी जुर्माना (Fine) लगाएगा।
सोशल मीडिया पर वीडियो और फोटो शेयर करने पर पाबंदी
सांप्रदायिक तनाव से बचने के लिए, पुलिस के साइबर सेल ने सोशल मीडिया को लेकर सख्त हिदायत दी है।
कुर्बानी करते समय के वीडियो या जानवरों के खून से सने फोटो फेसबुक, व्हाट्सएप या इंस्टाग्राम जैसे किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर करना सख्त वर्जित है।
यदि ऐसी कोई पोस्ट या वीडियो शेयर किया जाता है जो किसी समुदाय की भावनाओं को आहत करता है, तो उसे शेयर करने वाले के साथ-साथ व्हाट्सएप ग्रुप के एडमिन (Admin) पर भी सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम की धारा 66 (A) और IPC/BNS की धारा 153A (विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देना) के तहत तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज कर जेल भेजा जाएगा।
परिवहन को लेकर पुलिस की सघन चेकिंग
जानवरों को एक राज्य से दूसरे राज्य या एक शहर से दूसरे शहर ले जाने (Transportation) के नियमों को भी सख्त कर दिया गया है। पशुओं को ट्रकों या वाहनों में ठूंस-ठूंस कर ले जाना पशु क्रूरता (Animal Cruelty) की श्रेणी में आता है। पुलिस राजमार्गों पर सघन चेकिंग अभियान चला रही है। वाहन में पशुओं की संख्या तय सीमा से अधिक मिलने पर गाड़ी सीज कर दी जाएगी और चालक के साथ-साथ पशु मालिक पर भी केस दर्ज किया जाएगा।
शांति समितियों की बैठकों का दौर जारी
प्रशासन केवल सख्ती ही नहीं बरत रहा है, बल्कि संवाद का भी सहारा ले रहा है। सभी थाना प्रभारियों (SHOs) को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने इलाकों के धर्मगुरुओं, मौलानाओं और शांति समितियों के सदस्यों के साथ बैठकें करें। उनसे अपील की जा रही है कि वे अपने समुदाय के लोगों को इन नए कानूनी दिशा-निर्देशों के बारे में जागरूक करें और त्योहार को भाईचारे और शांति के साथ मनाने की प्रेरणा दें।