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कूटनीति का नया अध्याय: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो 4 दिवसीय भारत दौरे पर

मदर टेरेसा हाउस से की शुरुआत

भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती सामरिक और कूटनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत करने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अपने 4 दिवसीय महत्वपूर्ण भारत दौरे पर पहुंच गए हैं। अपने दौरे की शुरुआत उन्होंने कोलकाता से की, जहाँ उन्होंने मदर टेरेसा हाउस का भावपूर्ण दौरा किया। इसके बाद वे नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ कई वैश्विक मुद्दों पर गहन चर्चा करेंगे।

वैश्विक राजनीति में तेजी से बदलते समीकरणों और एशिया-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में उभरती नई चुनौतियों के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का भारत दौरा कूटनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अपने 4 दिवसीय आधिकारिक दौरे के पहले चरण में मार्को रुबियो पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता पहुंचे, जहाँ उनका भव्य स्वागत किया गया।

मदर टेरेसा हाउस का भावपूर्ण दौरा
कोलकाता पहुँचते ही अमेरिकी विदेश मंत्री ने सबसे पहले ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ के मुख्यालय यानी ‘मदर टेरेसा हाउस’ का दौरा किया। मार्को रुबियो ने मदर टेरेसा की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की और मानवता की सेवा में उनके द्वारा किए गए महान कार्यों को याद किया। उन्होंने वहां मौजूद ननों और कार्यकर्ताओं से बातचीत की तथा समाज के सबसे कमजोर और गरीब वर्ग के उत्थान के लिए किए जा रहे उनके प्रयासों की जमकर सराहना की। यह दौरा भारत की सांस्कृतिक और मानवीय विरासत के प्रति अमेरिका के सम्मान को दर्शाता है।

नई दिल्ली में होंगी उच्च स्तरीय बैठकें
कोलकाता प्रवास के बाद मार्को रुबियो राजधानी नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे। नई दिल्ली में उनका कार्यक्रम बेहद व्यस्त और रणनीतिक महत्व का है। उनकी सबसे प्रमुख मुलाकात भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर (Dr. S. Jaishankar) के साथ होगी। दोनों नेताओं के बीच रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, उन्नत तकनीकी साझेदारी और आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त लड़ाई जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर द्विपक्षीय वार्ता होगी। इसके अतिरिक्त, वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी शिष्टाचार भेंट करेंगे और अमेरिकी राष्ट्रपति का विशेष संदेश उन्हें सौंपेंगे।

दौरे का मुख्य एजेंडा और क्वाड (Quad) की तैयारी
कूटनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, इस दौरे का मुख्य एजेंडा आगामी क्वाड (Quad) शिखर सम्मेलन की रूपरेखा तैयार करना है। चीन की बढ़ती विस्तारवादी नीतियों को संतुलित करने के लिए भारत और अमेरिका दोनों एक सुरक्षित और स्वतंत्र इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के पक्षधर हैं। इसके अलावा, मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे युद्ध और रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में आ रही बाधाओं पर भी इस बैठक में विस्तार से चर्चा होने की पूरी संभावना है।

रूस से तेल खरीद पर भी हो सकती है चर्चा
हाल के दिनों में भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर छाया रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि अमेरिकी विदेश मंत्री इस विषय पर भी भारतीय नेतृत्व के साथ बातचीत करेंगे। हालांकि, भारत हमेशा से अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखते हुए स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता आया है। कुल मिलाकर, मार्को रुबियो का यह दौरा दोनों महान लोकतंत्रों के बीच आपसी विश्वास और साझेदारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाने का काम करेगा।