फुटबॉल से नशे के खिलाफ जंग, पंजाब का यह गांव बन रहा बदलाव की मिसाल
नशीले पदार्थों के खिलाफ अपनी जंग और तेजी से विकसित होती फुटबॉल संस्कृति के लिए पहचान बना रहे पंजाब के एक गांव में जमीनी स्तर की एक अकादमी चुपचाप नई मिसाल कायम कर रही है। इस अकादमी का मुख्य उद्देश्य बच्चों को गलियों और नशे के दुष्प्रभावों से दूर रखकर फुटबॉल के मैदानों में व्यस्त करना है।
जालंधर जिले के रुरका कलां स्थित यूथ फुटबॉल क्लब (वाईएफसी) खिलाड़ियों को जमीनी स्तर से तैयार करने में विश्वास रखता है और वर्तमान में कई चुनौतियों से जूझ रहे भारतीय फुटबॉल के विकास में अपना योगदान देना चाहता है।
हाल ही में स्ट्रीट चाइल्ड वर्ल्ड कप 2026 में उपविजेता रहने वाली यह अकादमी सत्र के दौरान लगभग 250 बच्चों को निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदान करती है। इसके साथ ही कई युवा खिलाड़ियों की छात्रावास, भोजन और आहार संबंधी जरूरतों का भी पूरा ध्यान रखा जाता है।

वाईएफसी अब पंजाब के विभिन्न हिस्सों में 14-15 केंद्र संचालित कर रही है, जिसके माध्यम से उसकी पहुंच 4,000 से 6,000 बच्चों तक बन चुकी है। स्ट्रीट चाइल्ड वर्ल्ड कप में भारतीय टीम को कोचिंग देने वाले पूर्व भारतीय डिफेंडर अनवर अली का मानना है कि भारतीय फुटबॉल की सबसे बड़ी समस्या अब भी जमीनी स्तर के विकास की उपेक्षा है, जबकि इंडियन सुपर लीग के आने से खेल में आर्थिक वृद्धि जरूर हुई है।
अनवर अली ने कहा, “हमारे पास संख्या तो है लेकिन गुणवत्ता नहीं है क्योंकि जमीनी स्तर पर ठीक से काम नहीं किया गया है।” उन्होंने कहा, “उज़्बेकिस्तान जैसे देश कभी हमारे साथ खेलते थे और आज वे विश्व कप तक पहुंच चुके हैं। हम सिर्फ आई-लीग, आईएसएल जैसे शीर्ष स्तर तक पहुंचने और भारत के लिए खेलने के बारे में सोचते हैं।”
अनवर का मानना है कि बेहतर पेशेवर व्यवस्था और आर्थिक स्थिति के बावजूद भारतीय फुटबॉल धीरे-धीरे एक आरामदायक स्थिति में पहुंच गया है। अपने खेल करियर के दौरान राष्ट्रीय टीम में बाइचुंग भूटिया और सुनील छेत्री जैसे खिलाड़ियों के साथ खेलने वाले अनवर ने कहा, “खिलाड़ियों को अच्छा पैसा मिल रहा है और हम एक आरामदायक स्थिति में आ गए हैं। कोई भी बाहर जाकर खुद को चुनौती देने की कोशिश नहीं करता।”
ओसीआई (विदेशी नागरिक) खिलाड़ियों को लेकर जारी बहस पर भी अनवर ने अपनी राय रखी। यह चर्चा उस समय और तेज हो गई जब रयान विलियम्स भारतीय नागरिकता हासिल करने के बाद भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले विदेशी मूल के खिलाड़ियों में शामिल हुए।
अनवर ने कहा, “अगर हम चाहते हैं कि ओसीआई खिलाड़ी दूसरे देशों में अपना विकास जारी रखें और वहां मौका नहीं मिलने पर यहां आ जाएं, तो फिर हम अपने खिलाड़ियों का विकास कहां कर रहे हैं?” उन्होंने आगे कहा, “हो सकता है कि इससे अगले दो से पांच वर्षों तक 10-15 खिलाड़ियों को मदद मिल जाए, लेकिन यह दीर्घकालिक समाधान नहीं है।”
अनवर ने यह टिप्पणी भारत की स्ट्रीट चाइल्ड वर्ल्ड कप टीम के सम्मान समारोह के दौरान की। भारतीय टीम फाइनल में ब्राजील से 4-2 से हार गई थी, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में अपने शानदार प्रदर्शन से उसने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
वाईएफसी के संस्थापक गौरमंडल दास के लिए फुटबॉल का मतलब केवल शीर्ष स्तर के खिलाड़ियों को तैयार करना नहीं है। उनके अनुसार, यह खेल सामाजिक बदलाव का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है। दास ने कहा, “इस अकादमी का उद्देश्य जमीनी स्तर पर फुटबॉल को बढ़ावा देना और इसे बच्चों के लिए सुलभ बनाना है।”
उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य पंजाब को नशामुक्त बनाना भी है और फुटबॉल इस दिशा में एक प्रभावी माध्यम साबित हो रहा है। यह सुविधा पूरी तरह निःशुल्क है और सत्र के दौरान यहां लगभग 250 बच्चे अभ्यास करते हैं। उनके भोजन और आहार संबंधी जरूरतों का भी पूरा ध्यान रखा जाता है।”
दास ने बताया कि अकादमी ने एक समय पेशेवर क्लब में बदलने पर विचार किया था, लेकिन बाद में यह महसूस किया गया कि जमीनी स्तर पर फुटबॉल को बढ़ावा देने से कहीं अधिक व्यापक सामाजिक प्रभाव पैदा किया जा सकता है।
उन्होंने कहा, “हमने इसे केवल अकादमी नहीं बल्कि एक पूर्णकालिक क्लब बनाने के बारे में भी सोचा था। लेकिन बाद में लगा कि ऐसा करने पर हमारा ध्यान केवल 20 खिलाड़ियों तक सीमित रह जाएगा और हम जमीनी स्तर पर बड़ी संख्या में खिलाड़ियों को तैयार नहीं कर पाएंगे।”