Trending

लद्दाख की दुर्गम वादियों में सेना का हेलीकॉप्टर क्रैश

तकनीकी खराबी बनी कारण, बाल-बाल बची तीनों सैन्य अधिकारियों की जान

देश की उत्तरी सीमा की सुरक्षा में मुस्तैद भारतीय सेना के एक नियमित गश्ती अभियान (पेट्रोलिंग) के दौरान लद्दाख के अत्यंत दुर्गम और पहाड़ी इलाके में सेना का एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त (क्रैश) हो गया। राहत और ईश्वर की बड़ी कृपा यह रही कि इस खौफनाक हादसे में हेलीकॉप्टर में सवार सभी तीनों सैन्य अधिकारी सुरक्षित हैं और उन्हें केवल मामूली चोटें ही आई हैं। सेना ने हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी (Court of Inquiry) के आदेश दे दिए हैं।

दुनिया के सबसे ऊंचे और खतरनाक रणक्षेत्र लद्दाख में भारतीय सेना की गश्त हमेशा जोखिमों से भरी होती है। खराब मौसम और ऊंचे-नीचे पहाड़ हमेशा पायलटों के कौशल की परीक्षा लेते हैं। इसी दुर्गम इलाके में भारतीय सेना का एक ‘एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर’ (ALH) अपने नियमित गश्ती मिशन के दौरान अचानक दुर्घटना का शिकार हो गया। घटना लेह से काफी दूर पूर्वी लद्दाख के एक निर्जन और बर्फीले इलाके में घटी।

कैसे हुआ यह हादसा?
सैन्य सूत्रों से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हेलीकॉप्टर एक महत्वपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्र में हवाई निगरानी (Air Reconnaissance) कर रहा था। उड़ान के दौरान ही पायलटों को इंजन या रोटर में किसी अचानक आई तकनीकी खराबी (Technical Snag) का आभास हुआ। लद्दाख की अत्यंत ऊंचाई और वहां बहने वाली तेज बर्फीली हवाओं के कारण हेलीकॉप्टर को नियंत्रित करना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया था। पायलटों ने सूझबूझ का परिचय देते हुए हेलीकॉप्टर की आपातकालीन लैंडिंग (Emergency Landing) कराने का प्रयास किया, लेकिन उबड़-खाबड़ जमीन होने के कारण हेलीकॉप्टर जमीन से टकराकर क्षतिग्रस्त हो गया।

पायलटों की सूझबूझ से बची तीन जानें
इस घटना में सबसे बड़ी और राहत देने वाली बात यह रही कि हेलीकॉप्टर में सवार दो अनुभवी पायलट और एक अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी चमत्कारिक रूप से मौत के मुंह से सुरक्षित वापस लौट आए। हेलीकॉप्टर के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के बावजूद, पायलटों के उत्कृष्ट प्रशिक्षण और अंतिम समय तक नियंत्रण बनाए रखने के प्रयास ने उन्हें बचा लिया। हादसे के तुरंत बाद तीनों अधिकारी खुद ही हेलीकॉप्टर के मलबे से सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे। उन्हें केवल कुछ मामूली खरोंचें और झटके लगे हैं।

त्वरित बचाव अभियान (Rescue Operation)
जैसे ही हेलीकॉप्टर से रेडियो संपर्क टूटा, भारतीय सेना और वायुसेना (IAF) ने तुरंत संयुक्त रूप से खोज और बचाव (Search and Rescue) अभियान शुरू कर दिया। कुछ ही समय में वायुसेना के बचाव हेलीकॉप्टरों ने दुर्घटनाग्रस्त हेलीकॉप्टर के मलबे और तीनों अधिकारियों को ट्रैक कर लिया। अधिकारियों को तुरंत एयरलिफ्ट करके लेह के सैन्य बेस अस्पताल में लाया गया, जहाँ उनकी विस्तृत चिकित्सा जांच की गई और सभी को खतरे से बाहर बताया गया है।

हादसे की जांच के आदेश (Court of Inquiry)
भारतीय सेना ने इस दुर्घटना को बेहद गंभीरता से लिया है। रक्षा मंत्रालय और सेना मुख्यालय ने हादसे के वास्तविक कारणों का सटीक पता लगाने के लिए तुरंत एक उच्च स्तरीय ‘कोर्ट ऑफ इंक्वायरी’ (Court of Inquiry) का गठन कर दिया है। यह जांच दल ब्लैक बॉक्स के डेटा, रडार की जानकारी और मौसम की स्थिति का विस्तृत तकनीकी विश्लेषण करेगा ताकि यह पता चल सके कि हादसा मशीनी खराबी की वजह से हुआ या लद्दाख के अप्रत्याशित मौसम के कारण। यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि देश के वीर जवान किन कठिन परिस्थितियों में सीमाओं की रक्षा करते हैं।