राजस्थान में वीआईपी कल्चर पर बड़ा प्रहार
सीएम के सख्त आदेश, मंत्रियों और IAS अधिकारियों की सरकारी खर्च पर विदेश यात्राओं पर लगी पूर्ण रोक

राजस्थान में सरकारी धन की बर्बादी रोकने और राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) लागू करने के लिए राज्य सरकार ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री के सख्त निर्देशों के बाद, राज्य के सभी कैबिनेट मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ प्रशासनिक (IAS/IPS) अधिकारियों की सरकारी खर्च पर होने वाली सभी प्रकार की विदेशी यात्राओं (Foreign Tours) पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
सरकारी पैसे पर ‘स्टडी टूर’ (Study Tour) के नाम पर विदेशों में छुट्टियां मनाने वाले नेताओं और नौकरशाहों (Bureaucrats) के लिए राजस्थान से एक बुरी खबर है। राज्य के मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक फिजूलखर्ची और ‘वीआईपी कल्चर’ (VIP Culture) को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, सरकारी खजाने से होने वाली सभी विदेशी यात्राओं पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध (Strict Ban) लगा दिया है।
क्या कहता है सरकार का नया आदेश?
मुख्य सचिव (Chief Secretary) कार्यालय द्वारा जारी किए गए आधिकारिक परिपत्र (Circular) में यह स्पष्ट किया गया है कि राज्य का कोई भी मंत्री, किसी भी बोर्ड/निगम का अध्यक्ष, या कोई भी प्रशासनिक अधिकारी (IAS/IFS) अब राज्य सरकार के खर्चे पर विदेश यात्रा पर नहीं जा सकेगा। अक्सर यह देखा जाता था कि अधिकारी या नेता सरकारी योजनाओं के अध्ययन, निवेश सम्मेलनों या ट्रेनिंग के नाम पर यूरोप, अमेरिका या ऑस्ट्रेलिया के लंबे दौरों पर जाते थे, जिसका राज्य के विकास में कोई खास लाभ नहीं दिखता था, लेकिन सरकारी खजाने पर करोड़ों रुपये का बोझ जरूर पड़ता था।
केवल अति-विशिष्ट मामलों में मिलेगी छूट
आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई विदेशी यात्रा राज्य के सामरिक, औद्योगिक निवेश या अत्यंत आवश्यक अंतरराष्ट्रीय समझौते (MOU) के लिए अपरिहार्य (Unavoidable) है, तो उसके लिए सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) से विशेष अनुमति लेनी होगी। इस अनुमति के लिए भी संबंधित विभाग को यह प्रमाणित करना होगा कि उस यात्रा से राज्य की जनता को सीधा और आर्थिक लाभ क्या मिलेगा।
राजकोषीय घाटे को कम करने की कवायद
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, राजस्थान सरकार इस समय भारी कर्ज और राजकोषीय घाटे का सामना कर रही है। ऐसे में नई कल्याणकारी योजनाओं (Welfare Schemes) को लागू करने के लिए सरकार को वित्तीय संसाधनों की सख्त जरूरत है। यह कड़ा फैसला उसी ‘मितव्ययिता’ (Austerity) नीति का हिस्सा है। इससे बचने वाले करोड़ों रुपये का उपयोग अब राज्य के ग्रामीण इलाकों में शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल सुविधाओं को बेहतर बनाने में किया जाएगा।
जनता ने किया फैसले का भारी स्वागत
सरकार के इस फैसले का आम जनता और नागरिक संगठनों ने भारी स्वागत किया है। सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि जो नेता और अधिकारी राज्य की जमीनी हकीकत को नहीं समझ सकते, वे विदेशों में जाकर क्या सीखेंगे। इस फैसले ने राजस्थान की नौकरशाही में एक स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकार का काम जनता की सेवा करना है, न कि जनता के पैसे पर ऐशो-आराम करना। यह कदम अन्य राज्यों के लिए भी एक बेहतरीन प्रशासनिक मिसाल (Example) बन सकता है।