खराब मौसम, धुंध और तूफानों को अब मात देंगे विमान! IGI एयरपोर्ट पर शुरू हुई देश की पहली ‘एविएशन वेदर नाउकास्टिंग’

हवाई सफर करने वाले यात्रियों के लिए खराब मौसम, अचानक आया तूफान या घनी धुंध अक्सर एक बुरे सपने की तरह होते हैं, जिसके कारण उड़ानें घंटों लेट हो जाती हैं या विमानों को दूसरे शहरों में डायवर्ट करना पड़ता है। लेकिन अब दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर इस समस्या का एक पक्का और हाई-टेक समाधान निकाल लिया गया है। IGI एयरपोर्ट पर उड़ानों की सुरक्षा और मौसम की पल-पल की सटीक जानकारी के लिए देश की पहली ‘एविएशन वेदर नाउकास्टिंग’ (Aviation Weather Nowcasting) सुविधा की शुरुआत कर दी गई है। यह तकनीक न केवल विमान हादसों को रोकेगी, बल्कि एयरलाइंस के करोड़ों रुपये के ईंधन की भी बचत करेगी।
क्या है ‘नाउकास्टिंग’ और यह फॉरकास्टिंग से कैसे अलग है?
हम आमतौर पर मौसम की जो जानकारी देखते हैं, वह ‘फॉरकास्टिंग’ (Forecasting) होती है, जो अगले 24 घंटों या कुछ दिनों का एक मोटा अनुमान बताती है। लेकिन ‘नाउकास्टिंग’ का मतलब है— ‘अभी क्या हो रहा है और अगले चंद मिनटों या अधिकतम 2 से 3 घंटों में ठीक क्या होने वाला है।’ एविएशन वेदर नाउकास्टिंग एक ऐसी अल्ट्रा-मॉडर्न प्रणाली है, जो हर 5 से 10 मिनट में एयरपोर्ट के रनवे और उसके आसपास के वायुमंडल की एकदम सटीक और रियल-टाइम रिपोर्ट तैयार करती है। इसमें हवा की दिशा, बादलों का घनत्व, अचानक आने वाली बारिश या विजिबिलिटी (दृश्यता) के स्तर की पिन-पॉइंट जानकारी शामिल होती है।
उड़ानों की सुरक्षा के लिए क्यों है यह संजीवनी?
विमान के टेक-ऑफ और लैंडिंग के समय सबसे बड़ा खतरा ‘विंड शियर’ (हवा की दिशा और गति में अचानक बदलाव) और ‘माइक्रोबर्स्ट’ (तेज आंधी का अचानक नीचे की ओर आना) का होता है। पुरानी मौसम प्रणालियां अक्सर इन अचानक होने वाले बदलावों को पकड़ने में चूक जाती थीं। लेकिन नाउकास्टिंग तकनीक में लगे अत्याधुनिक डॉपलर रडार और सेंसर इन खतरों को मिनटों पहले भांप लेते हैं। इससे एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (ATC) को तुरंत सटीक अलर्ट मिल जाता है और वे पायलट को सुरक्षित लैंडिंग या टेक-ऑफ टालने का निर्देश दे सकते हैं।
यात्रियों को राहत और ईंधन की भारी बचत
अक्सर मौसम खराब होने की आशंका में विमानों को एयरपोर्ट के ऊपर हवा में ही कई चक्कर (Holding) लगाने पड़ते हैं, जिसमें एयरलाइंस का टनों महंगा एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) बर्बाद होता है। कई बार विमानों को जयपुर या लखनऊ जैसे शहरों में डायवर्ट कर दिया जाता है, जिससे यात्रियों को भारी मानसिक और शारीरिक परेशानी उठानी पड़ती है। नाउकास्टिंग की वजह से अब पायलट को हवा में ही यह सटीक जानकारी मिल जाएगी कि मौसम कितने बजे खुलेगा, जिससे वे हवा में चक्कर लगाने के बजाय अपनी स्पीड को उसी हिसाब से एडजस्ट कर सकेंगे। इससे डायवर्जन के मामलों में भारी कमी आएगी।
भविष्य की तकनीक
IGI एयरपोर्ट देश का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है, जहां रोजाना लगभग 1200 से अधिक विमानों की आवाजाही होती है। ऐसे में यह तकनीक यहां के लिए अत्यंत आवश्यक थी। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के सहयोग से शुरू की गई यह प्रणाली पूरी तरह से ऑटोमेटेड है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करके मौसम के पैटर्न का विश्लेषण करती है।
‘एविएशन वेदर नाउकास्टिंग’ का दिल्ली एयरपोर्ट पर शुरू होना भारतीय उड्डयन क्षेत्र को विश्व स्तरीय सुरक्षा मानकों के समकक्ष खड़ा करता है। यह तकनीक पायलटों के लिए एक ‘तीसरी आंख’ का काम करेगी, जिससे न केवल हवाई सफर सुरक्षित होगा, बल्कि कोहरे और बारिश के मौसम में यात्रियों का कीमती समय भी बचेगा। उम्मीद है कि जल्द ही इसे मुंबई, बेंगलुरु और अन्य प्रमुख हवाई अड्डों पर भी लागू किया जाएगा।