यूपी में कुदरत का खौफनाक कहर
अचानक आई आंधी-बारिश ने लील लीं 28 जिंदगियां, आखिर मौसम विभाग क्यों नहीं दे पाया चेतावनी?

उत्तर प्रदेश में मौसम ने अचानक ऐसा रौद्र रूप दिखाया जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। भीषण गर्मी और लू के बीच अचानक बदले मौसम ने पूरे राज्य में तबाही का ऐसा मंजर ला खड़ा किया है, जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है। तेज आंधी, तूफान और मूसलाधार बारिश के कारण राज्य के अलग-अलग हिस्सों में अब तक 28 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। यह तबाही इतनी अचानक आई कि लोगों को संभलने या सुरक्षित स्थानों पर छिपने का मौका ही नहीं मिला। इस भयानक आपदा ने प्रशासन और मौसम विभाग के पूर्वानुमान तंत्र पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कैसे मचा चंद मिनटों में इतना बड़ा हाहाकार?
दोपहर तक आसमान से आग बरस रही थी, लेकिन शाम ढलते-ढलते अचानक आसमान में काले घने बादल छा गए। इसके बाद 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली धूल भरी आंधी ने सब कुछ तहस-नहस करना शुरू कर दिया। ज्यादातर मौतें पेड़ गिरने, कच्चे मकानों की दीवारें ढहने, टिन शेड उड़ने और आकाशीय बिजली गिरने (Lightning strikes) के कारण हुई हैं। कई जगहों पर होर्डिंग्स और बिजली के खंभे उखड़कर सड़कों और वाहनों पर गिर गए, जिससे यातायात पूरी तरह ठप हो गया। ग्रामीण इलाकों में फसलों को भी भारी नुकसान पहुंचने की खबर है।
कौन-से इलाके हुए सबसे ज्यादा प्रभावित?
इस खौफनाक तूफान का सबसे ज्यादा असर अवध, बुंदेलखंड और पूर्वांचल के इलाकों में देखने को मिला है। लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, आगरा, और जौनपुर सहित कई जिलों में भारी तबाही की खबरें सामने आई हैं। बिजली के तार टूटने से कई जिलों में ‘ब्लैकआउट’ की स्थिति पैदा हो गई है। अस्पताल और आपातकालीन सेवाएं भी इस बिजली कटौती से जूझ रही हैं, जिससे घायलों के इलाज में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार का एक्शन और मुआवजे का ऐलान
इस दर्दनाक हादसे पर मुख्यमंत्री ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता (Ex-gratia) देने का ऐलान किया गया है। साथ ही, जिन लोगों के घर टूटे हैं या मवेशियों की जान गई है, उन्हें भी आपदा राहत कोष से मदद दी जाएगी।
मौसम विभाग पर उठ रहे सवाल
इस तबाही के बाद सबसे बड़ा सवाल मौसम विभाग (IMD) की कार्यप्रणाली पर उठ रहा है। क्या मौसम विभाग के पास इस अचानक बनने वाले दबाव (Low-pressure area) और भयंकर तूफान की सटीक जानकारी नहीं थी? अगर थी, तो आम जनता तक समय रहते इसका अलर्ट (Red/Orange Alert) क्यों नहीं पहुंचाया गया? अगर लोगों को पहले से चेतावनी मिल जाती, तो शायद इतनी बड़ी संख्या में लोगों को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती।
उत्तर प्रदेश में आई यह आपदा सिर्फ एक प्राकृतिक घटना नहीं, बल्कि हमारे आपदा प्रबंधन तंत्र के लिए एक बड़ा सबक है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के इस दौर में मौसम कब, क्या करवट ले ले, यह कहना मुश्किल है। ऐसे में हमें केवल राहत कार्यों पर निर्भर रहने के बजाय अर्ली वार्निंग सिस्टम (Early Warning System) को और अधिक मजबूत और जमीनी स्तर तक प्रभावी बनाने की सख्त जरूरत है।