CBSE को मिला नया ‘बॉस’
भारी OSM विवाद और छात्रों के आक्रोश के बीच प्रशांत सीताराम लोखंडे बने नए अध्यक्ष, साख बचाने की होगी सबसे बड़ी चुनौती

देश के लाखों छात्रों के भविष्य की जिम्मेदारी संभालने वाले केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में एक बड़ा फेरबदल हुआ है। ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (On-Screen Marking – OSM) प्रणाली को लेकर मचे भारी बवाल और चौतरफा आलोचनाओं के बीच, केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए प्रशांत सीताराम लोखंडे (Lokhande Prashant Sitaram) को CBSE का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब बोर्ड अपनी विश्वसनीयता के सबसे गहरे संकट से गुजर रहा है।
क्या है OSM विवाद जिसने हिलाई CBSE की नींव?
बीते कुछ हफ्तों से CBSE की ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ प्रणाली शिक्षा जगत में भूचाल लाए हुए है। इस डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के तहत शिक्षकों को कंप्यूटर स्क्रीन पर उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करनी थी। लेकिन, तकनीकी खामियों, सर्वर क्रैश और सॉफ्टवेयर में ग्लिच के कारण मूल्यांकन में भारी गड़बड़ियां सामने आईं।
हजारों छात्रों के अंकों की गणना में भारी गलतियां पाई गईं—किसी को उम्मीद से बहुत कम अंक मिले, तो किसी की मार्कशीट में विषयों के नंबर ही गायब थे। इस अव्यवस्था के कारण न केवल बोर्ड के नतीजे विवादों में आ गए, बल्कि देश भर में छात्रों और अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा। कई शहरों में इसे लेकर विरोध प्रदर्शन हुए और सोशल मीडिया पर CBSE के खिलाफ मुहीम छिड़ गई। इस विवाद ने बोर्ड की पारदर्शिता और कार्यक्षमता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
कौन हैं प्रशांत सीताराम लोखंडे?
प्रशांत सीताराम लोखंडे एक अनुभवी और तेज-तर्रार नौकरशाह हैं। सरकार ने इस पद के लिए उनका चुनाव उनकी प्रशासनिक दक्षता और संकट के समय (Crisis Management) में काम करने की उनकी क्षमता को देखते हुए किया है। सरकार की ओर से यह सीधा संदेश है कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्हें तत्काल प्रभाव से पदभार ग्रहण करने और स्थिति को नियंत्रण में लाने का निर्देश दिया गया है।
नए अध्यक्ष के सामने ‘कांटों का ताज’
लोखंडे के लिए CBSE प्रमुख की यह कुर्सी किसी ‘कांटों के ताज’ से कम नहीं है। पद संभालते ही उनके सामने कई गंभीर और तात्कालिक चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं:
छात्रों का भरोसा जीतना: सबसे पहला काम OSM गड़बड़ी के शिकार छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का पारदर्शी तरीके से पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) करवाना और उन्हें न्याय दिलाना है।
तकनीकी खामियों को दूर करना: OSM सिस्टम का पूर्ण रूप से ऑडिट करवाना और यह सुनिश्चित करना कि भविष्य में ऐसी तकनीकी चूक दोबारा न हो।
सिस्टम में जवाबदेही तय करना: इस भारी गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और वेंडर्स की पहचान कर उन पर कड़ी कार्रवाई करना।
आगामी परीक्षाओं की रणनीति: अगले साल की बोर्ड परीक्षाओं के लिए एक त्रुटिहीन और फूलप्रूफ मूल्यांकन प्रणाली तैयार करना ताकि छात्रों का तनाव कम हो सके।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशांत लोखंडे की नियुक्ति एक सकारात्मक कदम है, लेकिन डैमेज कंट्रोल के लिए उन्हें कुछ कड़े और साहसिक फैसले लेने होंगे। देश भर के करोड़ों छात्रों और उनके अभिभावकों की निगाहें अब नए अध्यक्ष पर टिकी हैं कि वे कैसे CBSE की खोई हुई साख को वापस लाते हैं।