दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: भारी बारिश से तबाह हुई फसलों के लिए अब मिलेगा ₹75,000 प्रति हेक्टेयर मुआवजा

नई दिल्ली (पल्लवी श्रीवास्तव): मौसम के बदलते मिजाज और बेमौसम भारी बारिश की मार झेल रहे किसानों के लिए दिल्ली सरकार ने एक बहुत बड़ी राहत का ऐलान किया है। सरकार ने प्राकृतिक आपदा के कारण फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की राशि को ऐतिहासिक रूप से बढ़ाते हुए ₹75,000 प्रति हेक्टेयर करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी इस फैसले को ग्रामीण दिल्ली के किसानों की आर्थिक रीढ़ को मजबूत करने की दिशा में एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ समय से लगातार हो रही असमय बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया है।
असमय मौसम की मार और पुराना संकट
दरअसल, पिछले कुछ महीनों में दिल्ली और उसके आस-पास के मैदानी इलाकों में मौसम का चक्र पूरी तरह से बदला हुआ नजर आया है। जब फसलों के पकने या कटने का समय होता है, ठीक उसी दौरान तेज हवाओं के साथ भारी बारिश और ओलावृष्टि ने दस्तक दे दी, जिससे गेहूं, सरसों और सब्जियों की फसलों को व्यापक क्षति पहुँची। इससे पहले सरकार द्वारा तय की गई मुआवजे की राशि बेहद कम थी, जिससे किसानों की केवल लागत का एक छोटा हिस्सा ही निकल पाता था। किसान संगठनों द्वारा लगातार यह मांग की जा रही थी कि महंगाई और बीज-खाद के बढ़े दामों को देखते हुए राहत राशि में तत्काल बढ़ोतरी की जाए।
मुआवजे की नई नीति और पारदर्शिता पर जोर
दिल्ली सरकार की इस नई नीति के तहत, राजस्व विभाग की टीमों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रभावित गांवों का तुरंत दौरा करें और फसलों के नुकसान का सटीक आकलन (गिरदावरी) करें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए मुआवजे की पूरी राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से ट्रांसफर की जाएगी। इसके अलावा, नुकसान के सर्वे में किसी भी तरह की लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
किसानों के भविष्य के लिए संजीवनी
खेती को घाटे का सौदा मानने वाले इस दौर में ₹75,000 प्रति हेक्टेयर का यह मुआवजा दिल्ली के छोटे और सीमांत किसानों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। इससे न केवल वे अपने पुराने कर्ज को चुकाने की स्थिति में आ सकेंगे, बल्कि आगामी सीजन की फसलों के लिए बीज, खाद और सिंचाई की व्यवस्था भी दोबारा कर पाएंगे। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अन्य राज्य सरकारों को भी दिल्ली सरकार के इस मॉडल को अपनाना चाहिए ताकि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की मार झेल रहे अन्नदाता को हर संभव सुरक्षा चक्र प्रदान किया जा सके।