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यूपी में सरकारी वकीलों का बढ़ा मानदेय

एक दशक से ज्यादा समय बाद मुख्यमंत्री योगी ने पूरी की मांग

लखनऊ ( राघवेंद्र प्रताप सिंह) : उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न न्यायालयों में राज्य सरकार का पक्ष रखने वाले शासकीय अधिवक्ताओं की रिटेनरशिप और बहस फीस (प्रति सुनवाई फीस) में बढ़ोतरी के फैसले का अधिवक्ता समुदाय ने जोरदार स्वागत किया है। प्रदेश के महाधिवक्ता और उनकी पूरी कानूनी टीम ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस कदम को ऐतिहासिक और दूरदर्शी बताया है। वकीलों का मानना है कि इस फैसले से कोर्ट में राज्य सरकार के मामलों की पैरवी को एक नई ताकत और ऊर्जा मिलेगी।

शासकीय अधिवक्ताओं के मुताबिक, बदलते न्यायिक माहौल, मुकदमों की लगातार बढ़ती संख्या और विधिक (कानूनी) जटिलताओं को देखते हुए पारिश्रमिक के पुनरीक्षण (Revision) की मांग लंबे समय से की जा रही थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट ने इस आवश्यकता को समझते हुए रिटेनरशिप और बहस फीस में 50 प्रतिशत तक की रिकॉर्ड वृद्धि को मंजूरी दी है। इस फैसले से अधिवक्ताओं का मनोबल बढ़ेगा और वे कोर्ट में शासन का पक्ष और अधिक मजबूती व गुणवत्ता के साथ रख सकेंगे।

अधिवक्ता समुदाय ने इस बात पर विशेष खुशी जताई है कि सरकार ने एक लंबे सूखे को खत्म किया है।