विश्व पर्यावरण दिवस: ‘ग्रीन ग्लोबल लीडर’ बनकर उभरता भारत, प्रकृति को बचाने की महामुहीम में देश का ऐतिहासिक योगदान

जौनपुर (अभिषेक सिंह): आज 5 जून है, यानी ‘विश्व पर्यावरण दिवस’ (World Environment Day)। यह दिन केवल कैलेंडर में दर्ज एक तारीख मात्र नहीं है, बल्कि यह पूरी मानव जाति के लिए एक ‘अलार्म’ है। इस साल हमने जिस तरह की भीषण गर्मी, लू (Heatwave) और जल संकट का सामना किया है, वह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि प्रकृति अब हमारे साथ और समझौता करने के मूड में नहीं है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) अब भविष्य की चेतावनी नहीं, बल्कि वर्तमान की एक खौफनाक सच्चाई बन चुका है। ऐसे में आज का दिन हमें यह याद दिलाता है कि यदि हमने ‘अब’ कुछ नहीं किया, तो शायद ‘कभी’ कुछ करने का मौका ही न मिले।
लेकिन निराशा के इस वैश्विक माहौल में एक बहुत बड़ी उम्मीद की किरण भारत से नजर आती है। जब बात पर्यावरण संरक्षण की होती है, तो आज का नया भारत विश्व पटल पर केवल कोरे वादे नहीं कर रहा है, बल्कि ठोस काम करके दिखा रहा है। भारत आज दुनिया के लिए एक ‘ग्रीन ग्लोबल लीडर’ के रूप में उभर रहा है। आइए समझते हैं कि हमारी धरती को बचाने के इस महायज्ञ में भारत क्या और कितना बड़ा योगदान दे रहा है।
पर्यावरण संरक्षण में भारत का ऐतिहासिक योगदान
वैश्विक मंचों पर भारत ने बार-बार यह साबित किया है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों एक साथ चल सकते हैं। हमारी सनातन संस्कृति में तो नदियों को माता और वृक्षों को देवता माना गया है, और इसी सोच को भारत आज आधुनिक नीतियों के जरिए दुनिया के सामने रख रहा है:
मिशन LiFE (Lifestyle for Environment): भारत ने दुनिया को ‘मिशन लाइफ’ का मंत्र दिया है। इसका सीधा अर्थ है—पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाना। ‘यूज़ एंड थ्रो’ (Use and Throw) की पश्चिमी संस्कृति के बजाय भारत ‘रिड्यूस, रीयूज और रीसायकल’ (Reduce, Reuse, Recycle) के मॉडल को वैश्विक स्तर पर प्रमोट कर रहा है। यह पहल दुनिया भर के लोगों को रोजमर्रा के जीवन में ऐसे छोटे बदलाव करने के लिए प्रेरित कर रही है, जो पर्यावरण को बचा सकें।
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) का नेतृत्व: सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत ने फ्रांस के साथ मिलकर ‘अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन’ की स्थापना की है। आज भारत न केवल खुद बड़े पैमाने पर सोलर पार्क बना रहा है, बल्कि दुनिया भर के देशों को जीवाश्म ईंधन (कोयला, पेट्रोल) पर निर्भरता कम करने के लिए प्रेरित कर रहा है। भारत आज दुनिया में नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) क्षमता के मामले में शीर्ष देशों में शामिल है।
‘पंचामृत’ का संकल्प और नेट जीरो का लक्ष्य: ग्लासगो (COP26) शिखर सम्मेलन में भारत ने दुनिया के सामने ‘पंचामृत’ का ऐतिहासिक संकल्प रखा था। इसके तहत भारत ने 2070 तक कार्बन उत्सर्जन को ‘नेट जीरो’ (Net Zero) करने का लक्ष्य तय किया है। विकसित देशों की तुलना में भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन आज भी बहुत कम है, फिर भी हम अपनी जिम्मेदारी से बढ़कर जलवायु संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं।
स्वच्छ ईंधन की ओर बड़ा कदम: पेट्रोल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग (Ethanol Blending) का लक्ष्य भारत ने समय से पहले हासिल कर लिया है। इसके साथ ही ‘नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन’ के जरिए भारत खुद को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात का एक ग्लोबल हब बना रहा है, जो भविष्य का सबसे स्वच्छ ईंधन है।
जैव विविधता (Biodiversity) और वन क्षेत्र में वृद्धि: जहां दुनिया भर में जंगल कट रहे हैं, वहीं भारत की हालिया वन रिपोर्टें बताती हैं कि देश में फॉरेस्ट और ट्री कवर (Forest and Tree Cover) लगातार बढ़ रहा है। प्रोजेक्ट टाइगर (Project Tiger), प्रोजेक्ट चीता और हाथियों के संरक्षण में भारत की सफलता दुनिया के लिए एक केस स्टडी बन चुकी है।
व्यक्तिगत जिम्मेदारी का समय
सरकारें और वैश्विक संस्थाएं अपना काम कर रही हैं, लेकिन विश्व पर्यावरण दिवस का असली मकसद तब तक पूरा नहीं होगा, जब तक आम नागरिक अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे। आज हमें यह संकल्प लेना होगा कि हम सिंगल यूज़ प्लास्टिक का बहिष्कार करेंगे, पानी की हर एक बूंद बचाएंगे और अपने जीवन में कम से कम एक पेड़ लगाकर उसे बड़ा करने की जिम्मेदारी जरूर लेंगे।
हमें यह समझना होगा कि हमारे पास रहने के लिए कोई ‘प्लैनेट बी’ (Planet B) नहीं है। यह धरती ही हमारा इकलौता घर है। विश्व पर्यावरण दिवस के इस अवसर पर भारत का यह मॉडल पूरी दुनिया के लिए एक संदेश है— “प्रकृति की रक्षा ही मानवता की रक्षा है।” आइए, एक हरे-भरे और सुरक्षित भविष्य के लिए आज से ही शुरुआत करें।