परीक्षाओं में धांधली पर फूटा युवाओं का आक्रोश
जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' का हल्ला बोल, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

नई दिल्ली (पल्लवी श्रीवास्तव): देश में प्रतियोगी और प्रवेश परीक्षाओं के सिस्टम पर लगातार उठ रहे सवालों, पेपर लीक की घटनाओं और प्रशासनिक खामियों ने अब एक बड़े जन-आंदोलन का रूप लेना शुरू कर दिया है। इसी आक्रोश को एक मजबूत मंच देने के लिए आज देश की राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर एक बड़े विरोध प्रदर्शन का गवाह बन रहा है। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक और युवा एक्टिविस्ट अभिजीत दिपके के नेतृत्व में आज हजारों छात्र व युवा परीक्षाओं में हो रही व्यापक गड़बड़ियों के खिलाफ सड़क पर उतर आए हैं। इस उग्र प्रदर्शन की सबसे बड़ी और एकमात्र मांग है—सिस्टम की नाकामी की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का तत्काल इस्तीफा।
क्यों उबला छात्रों का गुस्सा?
एक पत्रकार के नजरिए से यदि हम इस पूरे घटनाक्रम का विश्लेषण करें, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि यह गुस्सा रातों-रात नहीं पनपा है। पिछले कुछ वर्षों में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं से लेकर विभिन्न राज्यों की भर्ती परीक्षाओं में जिस तरह की धांधली, डार्क वेब पर पेपर लीक और परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों (जैसे NTA) की तकनीकी विफलताएं सामने आई हैं, उसने पूरी शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को कठघरे में खड़ा कर दिया है। एक आम छात्र जो सीमित संसाधनों के बीच सालों तक दिन-रात एक करके तैयारी करता है, जब उसे पता चलता है कि शिक्षा माफियाओं ने सिस्टम में सेंध लगाकर परीक्षा को ही मजाक बना दिया है, तो यह केवल एक पेपर का रद्द होना नहीं होता; यह एक पूरी पीढ़ी के सपनों और उसके भविष्य की सरेआम हत्या होती है। अभिजीत दिपके का यह प्रदर्शन इसी ‘सिस्टमैटिक फेलियर’ (Systemic Failure) के खिलाफ एक शंखनाद है।
जवाबदेही शीर्ष से तय करने की मांग
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं का सीधा और जायज तर्क है कि जब परीक्षा प्रणाली में इतनी बड़ी सेंध लग रही है, तो केवल कुछ निचले स्तर के कर्मचारियों या सॉल्वर गैंग के गुर्गों को पकड़कर मामले की लीपापोती क्यों की जा रही है? अभिजीत दिपके का स्पष्ट कहना है कि इस पूरे तंत्र को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की है। ऐसे में जब सिस्टम बार-बार फेल हो रहा है, तो शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपनी नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी से कैसे बच सकते हैं? छात्रों का मानना है कि जब तक शीर्ष स्तर पर बैठे लोग जवाबदेही नहीं लेंगे, तब तक इस भ्रष्ट तंत्र में कोई भी वास्तविक सुधार संभव नहीं है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग इसी बात का प्रतीक है कि ‘सिस्टम की सफाई ऊपर से शुरू होनी चाहिए।’
विरोध प्रदर्शन का बदलता स्वरूप और CJP
यहाँ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और अभिजीत दिपके का नेतृत्व भारतीय राजनीति और विरोध प्रदर्शन के बदलते स्वरूप को भी दर्शाता है। एक समय था जब केवल मुख्यधारा के बड़े राजनीतिक दल ही ऐसे मुद्दे उठाते थे, जो अक्सर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप की भेंट चढ़ जाते थे। लेकिन आज सोशल मीडिया और डिजिटल युग की सक्रियता ने ऐसे नए मंचों को जन्म दिया है, जो बिना किसी राजनीतिक लाग-लपेट के सीधे युवाओं की नब्ज पकड़ते हैं। नाम भले ही व्यंग्यात्मक (Satirical) लगे, लेकिन CJP द्वारा उठाया गया यह मुद्दा आज देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ा सबसे गंभीर और ज्वलंत विषय है।
सरकार के लिए गंभीर चेतावनी
जंतर-मंतर पर आज उठ रही यह आवाज केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय के लिए एक गंभीर चेतावनी है। सत्ता पक्ष भले ही इसे राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज करने की कोशिश करे, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि देश का युवा सिस्टम से हताश और निराश है। अब देखना यह बेहद दिलचस्प होगा कि क्या सरकार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जंतर-मंतर से उठने वाली इस गूंज पर कोई ठोस कदम उठाते हैं, या फिर छात्रों के इस आक्रोश को केवल एक और धरना मानकर फाइलों में दफन कर दिया जाएगा? एक बात तो तय है कि जब तक परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह से पारदर्शी और माफिया-मुक्त नहीं बनाया जाता, तब तक देश की सड़कों पर युवाओं का यह संग्राम यूं ही जारी रहेगा।