पटना में ‘खान सर’ की गिरफ्तारी पर रात भर चला हाई-वोल्टेज ड्रामा
छात्रों के भारी विरोध के आगे बैरंग लौटी पुलिस

पटना (पल्लवी श्रीवास्तव): बिहार की राजधानी पटना का एजुकेशन हब माने जाने वाला इलाका बीती रात एक ऐसे अभूतपूर्व और तनावपूर्ण घटनाक्रम का गवाह बना, जिसने पुलिस और स्थानीय प्रशासन की नींद उड़ा दी। देश भर में अपने अनोखे, सरल और दिलचस्प पढ़ाने के अंदाज के लिए मशहूर ‘खान सर’ (Khan Sir) की गिरफ्तारी को लेकर बीती रात पटना में जमकर हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। पटना पुलिस की कई विशेष टीमें खान सर को गिरफ्तार करने के उद्देश्य से उनके कोचिंग सेंटर और संभावित ठिकानों पर दलबल के साथ पहुंचीं थीं। लेकिन हजारों की संख्या में छात्रों के भारी विरोध, नारेबाजी और हंगामे के कारण पुलिस अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सकी और उसे आधी रात को बैरंग वापस लौटना पड़ा।
क्या है पूरा विवाद और पुलिस की कार्रवाई का कारण?
इस पूरे विवाद की जड़ें पिछले कुछ दिनों से राज्य में चल रहे उस उग्र छात्र आंदोलन से जुड़ी हैं, जो प्रतियोगी परीक्षाओं (विशेषकर रेलवे और राज्य स्तरीय भर्तियों) में कथित धांधली, अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में हो रहा है। प्रशासन और पुलिस का आरोप है कि छात्रों को सड़क पर उतरने, रेल ट्रैक जाम करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए उकसाने में पटना के कुछ बड़े कोचिंग संचालकों की अहम भूमिका रही है। पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर (FIR) में भीड़ को भड़काने, हिंसा के लिए प्रेरित करने और कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की गंभीर धाराओं के तहत खान सर सहित कुछ अन्य शिक्षकों को नामजद किया गया है। इसी सिलसिले में पुलिस बीती रात उन्हें हिरासत में लेने पहुंची थी।
आधी रात का वो खौफनाक मंजर और छात्रों की ढाल
जैसे ही पुलिस की भारी भरकम टीम के पहुंचने की भनक छात्रों और स्थानीय युवाओं को लगी, सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुप्स के जरिए यह खबर आग की तरह फैल गई। देखते ही देखते आधी रात को ही कोचिंग सेंटर और उनके आवास के बाहर सैकड़ों-हजारों की संख्या में छात्र जमा हो गए। छात्रों ने पूरी तरह से पुलिस का रास्ता रोक लिया और मानव श्रृंखला (Human Chain) बनाकर सरकार व प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि ऐसा लगा मानो किसी भी पल दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प हो सकती है।
हालात को बेकाबू होता देख पुलिस को अतिरिक्त बल और वज्र वाहन (Riot Control Vehicle) मंगाने पड़े। लेकिन छात्रों का हुजूम टस से मस होने को तैयार नहीं था। अधिकारियों को यह एहसास हो गया कि यदि इस समय बल प्रयोग या लाठीचार्ज किया गया, तो हालात पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो जाएंगे और पटना की सड़कों पर भयंकर कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो जाएगी। किसी भी बड़े टकराव को टालने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी रणनीति बदली और तड़के सुबह पुलिस की टीमों को वहां से वापस बुलाने का निर्णय लिया।
छात्रों का अटूट समर्थन: “सिस्टम की नाकामी, शिक्षक की बलि”
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि पटना और पूरे देश के छात्रों के बीच खान सर की लोकप्रियता किस कदर हावी है। सड़क पर उतरे छात्रों का साफ कहना था कि उनके गुरु केवल उनके अधिकारों की जायज मांग उठा रहे हैं। छात्रों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि असली गुनहगार वे शिक्षा माफिया और अधिकारी हैं जो पेपर लीक करवाते हैं और भर्ती प्रक्रियाओं में धांधली करते हैं, लेकिन सरकार अपनी नाकामी और सिस्टम के खोखलेपन को छिपाने के लिए एक सच्चे शिक्षक को ‘बलि का बकरा’ बना रही है।
सियासी बयानबाजी और आगे की कानूनी राह
इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद बिहार का सियासी पारा भी अपने चरम पर पहुंच गया है। विपक्षी दलों ने पुलिस की इस ‘आधी रात की छापेमारी’ को तानाशाही करार देते हुए कड़ी निंदा की है और राज्य सरकार पर छात्रों की आवाज को बेरहमी से कुचलने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, पुलिस महकमे के सूत्रों का कहना है कि खान सर की गिरफ्तारी सिर्फ टली है, लेकिन कानूनी प्रक्रिया अभी खत्म नहीं हुई है।
अब इस बात की प्रबल संभावना है कि खान सर के वकील गिरफ्तारी की लटकती तलवार से बचने के लिए अदालत का रुख करेंगे और अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की याचिका दायर करेंगे। फिलहाल पटना के कोचिंग इलाकों, विशेषकर अशोक राजपथ, नया टोला और भिखना पहाड़ी में तनावपूर्ण शांति पसरी हुई है। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात है, लेकिन इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि छात्रों के मुद्दों को पुलिसिया कार्रवाई से नहीं, बल्कि एक पारदर्शी सिस्टम बनाकर ही सुलझाया जा सकता है।