आम जनता की जेब पर एक और करारी मार
बिहार में सरकारी बसों का किराया 15% बढ़ा, 8 जून से निजी बसें भी वसूलेंगी ज्यादा दाम

पटना (अभिषेक सिंह): भीषण गर्मी और महंगाई की चौतरफा मार झेल रही बिहार की आम जनता के लिए एक बेहद परेशान करने वाली और आर्थिक बोझ बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) ने अपनी सभी श्रेणियों की बसों के किराए में 15 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी करने का आधिकारिक फैसला लिया है। सरकारी बसों के इस फैसले के तुरंत बाद, राज्य की प्राइवेट बस ऑपरेटर्स यूनियन ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए आगामी 8 जून से अपनी सभी बसों का किराया बढ़ाने का बड़ा ऐलान कर दिया है। सरकार और निजी ऑपरेटरों के इस दोहरे कदम से अब बिहार में एक शहर से दूसरे शहर की यात्रा करना काफी महंगा होने जा रहा है, जिससे सीधे तौर पर मध्यम और निम्न वर्ग के दैनिक यात्रियों का मासिक बजट पूरी तरह से बिगड़ जाएगा।
सरकारी निगम का तर्क: घाटे और ईंधन की कीमतों का हवाला
बिहार राज्य पथ परिवहन निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, बसों के संचालन में आ रही लगातार लागत में वृद्धि के कारण यह फैसला लेना बेहद जरूरी हो गया था। निगम का तर्क है कि डीजल की कीमतों में लगातार हो रहे उतार-चढ़ाव, बसों के कल-पुर्जों (Spares) की बढ़ती महंगाई और कर्मचारियों के रख-रखाव के खर्च के कारण परिवहन विभाग लगातार घाटे में चल रहा था। अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने और सेवाओं को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए निगम ने 15% की इस बढ़ोतरी को मजबूरी का नाम दिया है। यह नया किराया चार्ट तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।
निजी बस यूनियनों की लामबंदी और 8 जून की डेडलाइन
सरकारी किराए में बढ़ोतरी होते ही निजी बस मालिकों के संगठन भी तुरंत एक्टिव मोड में आ गए। प्राइवेट बस यूनियन का साफ कहना है कि जब सरकारी बसों को चलाने में इतनी दिक्कतें आ रही हैं, तो निजी ऑपरेटर्स बिना किराया बढ़ाए कैसे सरवाइव कर सकते हैं? उन्होंने घोषणा की है कि 8 जून से पूरे बिहार में चलने वाली सभी लंबी और छोटी दूरी की प्राइवेट, डीलक्स और एसी (AC) बसों के किराए में भी इसी अनुपात में या इससे अधिक की वृद्धि की जाएगी। इसके लिए उन्होंने नए रूट चार्ट और किराए की लिस्ट तैयार करना भी शुरू कर दिया है।
दैनिक यात्रियों और छात्रों पर पड़ेगा सबसे बुरा असर
एक जमीनी पत्रकार के रूप में जब हम इस फैसले के असर का आकलन करते हैं, तो साफ दिखता है कि इसका सबसे सीधा और क्रूर असर उन नौकरीपेशा लोगों, छोटे व्यापारियों और छात्रों पर पड़ेगा जो रोजगार और शिक्षा के लिए रोजाना पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर या गया जैसे बड़े शहरों के बीच बसों से सफर करते हैं। पहले से ही आवश्यक वस्तुओं और खाद्य पदार्थों की महंगाई से त्रस्त जनता के लिए यह बढ़ा हुआ किराया ‘करेले पर नीम चढ़ने’ जैसा है। इस फैसले के बाद अब राज्य सरकार के खिलाफ आम जनता और छात्र संगठनों का गुस्सा सोशल मीडिया से लेकर बस अड्डों तक पर देखने को मिलने लगा है, और मांग की जा रही है कि इस जनविरोधी फैसले को तुरंत वापस लिया जाए या इसमें आंशिक कटौती की जाए।