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अयोध्या और काशी की तर्ज पर चमकेगा नैमिषारण्य धाम

सीएम योगी ने दी भव्य कायाकल्प और नई परियोजनाओं को मंजूरी

लखनऊ (राघवेंद्र प्रताप सिंह): उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और पौराणिक विरासत को वैश्विक पटल पर स्थापित करने के अपने दृढ़ संकल्प को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक और बड़ा फैसला लिया है। अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और काशी विश्वनाथ धाम के ऐतिहासिक पुनरुद्धार के बाद, अब सरकार का पूरा ध्यान सीतापुर स्थित प्रसिद्ध पौराणिक और पावन तीर्थ ‘नैमिषारण्य धाम’ (Naimisharanya) पर है। श्री नैमिषारण्य धाम तीर्थ विकास परिषद की उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने इस पावन स्थल के समग्र कायाकल्प के लिए कई नई और भव्य ढांचागत परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है।

श्रद्धालुओं के लिए आधुनिक सुविधाएं और सड़कों का चौड़ीकरण
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि नैमिषारण्य धाम में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए वहां बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाया जाए। विकास योजनाओं के तहत धाम की ओर आने वाले सभी मुख्य मार्गों और आंतरिक सड़कों का चौड़ीकरण (Widening) किया जाएगा, जिससे यातायात सुगम हो सके। इसके अलावा, आगंतुकों के ठहरने के लिए आधुनिक गेस्ट हाउस, विश्राम गृह और पार्किंग स्थलों का निर्माण किया जाएगा।

डिजिटल संग्रहालय और चक्रतीर्थ की भव्य लाइटिंग
नैमिषारण्य के 88 हजार ऋषियों की इस तपोभूमि के महात्म्य और पौराणिक इतिहास से युवा पीढ़ी को रूबरू कराने के लिए धाम परिसर में एक अत्याधुनिक डिजिटल संग्रहालय (Digital Museum) और ओरिएंटेशन सेंटर बनाया जाएगा। इस संग्रहालय में लाइट एंड साउंड शो के जरिए 84 कोस की परिक्रमा और इस पावन भूमि के धार्मिक महत्व को दर्शाया जाएगा। इसके साथ ही, प्रसिद्ध ‘चक्रतीर्थ’ और उसके आसपास के घाटों की भव्य लाइटिंग और सौंदर्यीकरण का काम जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे शाम की आरती के समय यहाँ का नजारा अलौकिक और दिव्य नजर आए।

वैश्विक स्पिरिचुअल हब बनाने का बड़ा लक्ष्य
सीएम योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन है कि नैमिषारण्य को केवल एक क्षेत्रीय धार्मिक स्थल के रूप में न देखा जाए, बल्कि इसे अयोध्या और काशी की तरह एक प्रमुख ग्लोबल स्पिरिचुअल हब (Global Spiritual Hub) के रूप में विकसित किया जाए। इस कायाकल्प से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सीतापुर और आस-पास के जिलों में स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के हजारों नए अवसर भी पैदा होंगे। मुख्यमंत्री का यह फैसला उत्तर प्रदेश को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का देश में सबसे बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।