गरीब कल्याण योजना के 12 वर्ष पूरे
पीएम मोदी ने इसे 'मानव सशक्तिकरण का सामूहिक आंदोलन' करार दिया

नई दिल्ली (अभिषेक सिंह): भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में गरीबी उन्मूलन हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। लेकिन जब नीतियां सही नीयत के साथ जमीन पर उतरती हैं, तो उनका असर पीढ़ियों के जीवन को बदल देता है। आज केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘गरीब कल्याण योजना’ (Garib Kalyan Yojana) के सफलतापूर्वक 12 वर्ष पूरे हो गए हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना की सफलता को केवल एक सरकारी कार्यक्रम की उपलब्धि नहीं, बल्कि ‘मानव सशक्तिकरण की दिशा में एक सामूहिक आंदोलन’ (Collective Movement for Human Empowerment) बताया है।
योजना का दर्शन: ‘अंत्योदय’ और प्रत्यक्ष लाभ
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि इस योजना का मूल आधार ‘अंत्योदय’ है—यानी समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति का उत्थान। पिछले 12 वर्षों में इस योजना के अंतर्गत जिस पैमाने पर लोगों को भुखमरी और अभाव से निकाला गया है, वह दुनिया भर के लिए एक केस स्टडी है। मुफ्त राशन से लेकर प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (Direct Benefit Transfer – DBT) तक, गरीब कल्याण योजना ने यह सुनिश्चित किया है कि सरकारी खजाने का हर एक पैसा बिना किसी बिचौलिए के सीधे जरूरतमंद के खाते या उसके हाथों तक पहुंचे।
मानव सशक्तिकरण का ‘सामूहिक आंदोलन’ कैसे?
पीएम मोदी ने इसे ‘सामूहिक आंदोलन’ क्यों कहा, इसके पीछे एक गहरा अर्थ छिपा है। उनका मानना है कि जब सरकार एक गरीब परिवार के सिर पर छत (आवास योजना), घर में शौचालय, पीने का शुद्ध पानी और राशन सुनिश्चित करती है, तो वह परिवार अपनी दैनिक जद्दोजहद से बाहर निकलकर राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान देने लगता है। जब करोड़ों लोग एक साथ गरीबी रेखा से बाहर आते हैं और अपनी आर्थिक व सामाजिक स्थिति को मजबूत करते हैं, तो यह पूरे देश को आगे ले जाने वाला एक सामूहिक आंदोलन बन जाता है। इस योजना ने गरीबों के भीतर वह आत्मविश्वास भरा है कि अब वे सिर्फ ‘लाभार्थी’ नहीं, बल्कि भारत की विकास यात्रा के सक्रिय भागीदार हैं।
महामारी और संकट के दौर में बनी जीवनदायिनी
इस योजना का सबसे मजबूत परीक्षण वैश्विक महामारी कोविड-19 के दौरान हुआ। जब पूरी दुनिया आर्थिक मंदी और भुखमरी की आशंका से कांप रही थी, तब इस योजना के तहत देश के 80 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त अन्न उपलब्ध कराया गया। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं (जैसे IMF और World Bank) ने भी यह माना है कि इस व्यापक कल्याणकारी योजना के कारण ही भारत में भीषण संकट के बावजूद ‘अत्यधिक गरीबी’ (Extreme Poverty) के स्तर में कोई वृद्धि नहीं हुई।
सियासी असर और नए भारत का संकल्प
राजनीतिक रूप से देखें, तो ‘गरीब कल्याण’ प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार की वह धुरी रही है जिसने उन्हें लगातार जनता का अटूट विश्वास दिलाया है। ‘प्रो-पूअर’ (Pro-Poor) नीतियों ने यह भ्रम तोड़ा है कि विकास केवल बड़े शहरों या उद्योगपतियों तक सीमित होता है। 12 वर्ष पूरे होने पर पीएम मोदी का यह बयान इस बात का स्पष्ट संकल्प है कि भारत तब तक चैन से नहीं बैठेगा, जब तक देश से गरीबी का पूरी तरह से समूल नाश नहीं हो जाता। यह योजना आज केवल एक रिलीफ फंड नहीं, बल्कि नए और आत्मनिर्भर भारत की नींव बन चुकी है।