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काशी के घाटों पर नए युग की शुरुआत

अगले हफ्ते से चलेगा देश का पहला 'हाइड्रोजन लग्जरी क्रूज', प्रदूषण मुक्त होगी बाबा विश्वनाथ की नगरी

वाराणसी (विवेक ओझा): आध्यात्मिक नगरी काशी और बाबा विश्वनाथ के भक्तों के लिए पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बेहद क्रांतिकारी और ऐतिहासिक सौगात सामने आई है। वाराणसी में गंगा नदी के पावन घाटों पर बढ़ते प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन को पूरी तरह खत्म करने के लिए देश के पहले हाइड्रोजन-संचालित लग्जरी टूरिस्ट क्रूज (Hydrogen-Powered Luxury Cruise) का परिचालन अगले हफ्ते से आधिकारिक रूप से शुरू होने जा रहा है। ‘अलकनंदा-2’ नाम के इस अत्याधुनिक क्रूज के गंगा की लहरों पर उतरते ही भारत ने वैश्विक पटल पर हरित ऊर्जा (Green Energy) के क्षेत्र में अपनी तकनीकी आत्मनिर्भरता का एक और बड़ा प्रदर्शन कर दिया है।

क्या है हाइड्रोजन क्रूज की तकनीक और इसके पर्यावरण लाभ?
पारंपरिक रूप से गंगा में चलने वाली नावें, नावें और बड़े क्रूज मुख्य रूप से डीजल इंजनों से संचालित होते हैं। इन इंजनों से निकलने वाला धुआं और हानिकारक गैसें न केवल काशी की हवा को प्रदूषित करती थीं, बल्कि पानी में ईंधन के रिसाव से गंगा के जलीय इकोसिस्टम को भी भारी नुकसान पहुंचता था।

इस गंभीर समस्या का समाधान करने के लिए भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) और कोचीन शिपयार्ड ने मिलकर इस विशेष क्रूज को तैयार किया है। यह क्रूज पूरी तरह से ‘हाइड्रोजन फ्यूल सेल’ (Hydrogen Fuel Cell) तकनीक पर काम करता है। इसमें हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रक्रिया से बिजली पैदा की जाती है, जिससे क्रूज की मोटर चलती है। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे खास बात यह है कि इससे शून्य प्रदूषण (Zero Emission) होता है। इस क्रूज के साइलेंसर से धुएं की जगह केवल शुद्ध पानी की भाप (Water Vapor) बाहर निकलती है, जो पर्यावरण को तनिक भी नुकसान नहीं पहुंचाती।

पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार
यह हाइड्रोजन क्रूज केवल एक तकनीकी प्रयोग नहीं है, बल्कि काशी के पर्यटन उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान देने वाला माध्यम है। दो मंजिला इस शानदार क्रूज में यात्रियों के लिए विश्वस्तरीय लग्जरी सुविधाएं दी गई हैं। पूरी तरह से वातानुकूलित (Air-conditioned) इस क्रूज में विशाल ग्लास विंडो लगाई गई हैं, जिससे बैठकर सैलानी गंगा के घाटों और प्रसिद्ध गंगा आरती का एक विहंगम दृश्य देख सकेंगे।

अगले हफ्ते से शुरू हो रहे इस सफर के लिए बुकिंग विंडो को भी लाइव कर दिया गया है। काशी आने वाले विदेशी और घरेलू पर्यटकों के लिए यह सफर इको-टूरिज्म (Eco-tourism) का एक बेहतरीन अनुभव साबित होगा। उत्तर प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि काशी मॉडल की सफलता के बाद अयोध्या में सरयू नदी और प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर भी इसी तरह के हाइड्रोजन जहाजों का संचालन शुरू किया जाए, ताकि राज्य के धार्मिक पर्यटन को पूरी तरह ‘इको-फ्रेंडली’ बनाया जा सके।