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“नो मिशन, नो विजन, सिर्फ कंफ्यूजन”

विपक्षी एकजुटता की बैठक पर भाजपा का फौरन पलटवार, अंदरूनी कलह को उजागर कर सत्ता पक्ष ने कसा तंज

नई दिल्ली/पल्लवी श्रीवास्तव | नई दिल्ली में विपक्षी दलों की बैठक अभी खत्म भी नहीं हुई थी और साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की तैयारियां चल ही रही थीं कि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी चिर-परिचित आक्रामक शैली में विपक्ष के इस ‘महागठबंधन’ पर ऐसा तीखा वैचारिक हमला बोला, जिसने विपक्ष के नैरेटिव को बैकफुट पर धकेल दिया। भाजपा के केंद्रीय मुख्यालय से जारी एक आधिकारिक बयान और पार्टी के शीर्ष प्रवक्ताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस ने ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की इस बैठक को पूरी तरह से दिशाहीन और अवसरवादी करार दिया। भाजपा ने तीन शब्दों में इस पूरी कवायद का पोस्टमार्टम करते हुए कहा कि इस गठबंधन के पास “कोई मिशन नहीं है, कोई विजन नहीं है, यहां सिर्फ और सिर्फ कंफ्यूजन है।”

अंतर्विरोधों को बनाया सबसे बड़ा हथियार
भाजपा ने विपक्ष की बैठक पर हमला करने के लिए किसी बाहरी मुद्दे का सहारा नहीं लिया, बल्कि विपक्ष के अपने ही भीतर चल रहे गृहयुद्ध को अपना सबसे धारदार हथियार बना लिया। भाजपा प्रवक्ताओं ने साफ तौर पर कहा कि जो दल देश को एक मजबूत और स्थिर सरकार देने का दावा कर रहे हैं, वे एक कमरे में अपने सभी सहयोगियों को शांति से बैठाने तक में नाकाम रहे हैं।

सत्ता पक्ष ने विपक्ष की एकता के दावों की हवा निकालते हुए सीधे सवाल दागे। भाजपा ने पूछा कि जिस गठबंधन में तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी डीएमके कांग्रेस पर ‘धोखे’ का आरोप लगाकर बैठक का बहिष्कार कर रही हो, जहां आम आदमी पार्टी (AAP) दिल्ली और पंजाब के विवादों के कारण किनारे खड़ी हो, और जहां केरल में एक-दूसरे के खिलाफ हिंसक संघर्ष करने वाले सीपीएम और कांग्रेस दिल्ली में दोस्ती का दिखावा कर रहे हों—वहां वैचारिक स्थिरता कहां है? भाजपा का स्पष्ट आरोप था कि यह कोई ‘देश सुधारने’ का वैचारिक गठबंधन नहीं है, बल्कि यह उन क्षेत्रीय नेताओं का अवसरवादी जमावड़ा है, जो जांच एजेंसियों के डर से और अपनी खिसकती राजनीतिक जमीन को बचाने के लिए जबरन एक-दूसरे का हाथ थामने का स्वांग रच रहे हैं।

“प्रधानमंत्री पद की 23 खिड़कियां”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा के प्रवक्ताओं ने विपक्षी नेताओं की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं पर भी सीधा और अचूक प्रहार किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “इस तथाकथित ‘इंडिया’ गठबंधन में जितने दल शामिल हुए हैं, लगभग उतने ही प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं। दिल्ली के इस बंद कमरे में देश के विकास का कोई ठोस रोडमैप नहीं बन रहा था, बल्कि वहां इस बात की राजनीतिक सौदेबाजी चल रही थी कि किसका भ्रष्टाचार कैसे छुपाया जाए और किसे कौन सी कुर्सी दी जाए।” भाजपा ने यह नैरेटिव सेट करने की कोशिश की कि बिना किसी स्पष्ट चेहरे और बिना किसी साझी नीति के यह गठबंधन देश को केवल अराजकता की ओर ले जा सकता है।

नैरेटिव की इस जंग में कौन आगे?
एक राजनीतिक विश्लेषक और पत्रकार के तौर पर इस पूरे घटनाक्रम को देखें तो भाजपा ने बहुत ही चतुराई और आक्रामकता से विपक्ष के ‘शक्ति प्रदर्शन’ के गुब्बारे की हवा निकाल दी है। विपक्ष अभी बैठक के फैसलों को जनता के सामने ठीक से परोस भी नहीं पाया था कि भाजपा ने “नो मिशन, नो विजन, सिर्फ कंफ्यूजन” का एक ऐसा कैची (catchy) नारा दे दिया, जिसने सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा के न्यूज़ रूम तक पूरी बहस को अपने पक्ष में मोड़ लिया। यह फौरी पलटवार यह साबित करता है कि भाजपा की राजनीतिक मशीनरी हर वक्त पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है और वह विपक्ष को संभलने का एक सेकंड का भी मौका नहीं देना चाहती। ‘इंडिया’ गठबंधन के लिए अब चुनौती सिर्फ अपनी दरकती हुई एकजुटता को बचाना ही नहीं है, बल्कि भाजपा द्वारा गढ़े गए इस ‘कंफ्यूजन’ वाले नैरेटिव को गलत साबित करना भी है—जो मौजूदा जमीनी अंतर्विरोधों को देखते हुए फिलहाल एवरेस्ट चढ़ने जितना मुश्किल नजर आता है।