Trending

‘लाल सागर’ बना मौत का कुआँ: ओमान तट पर अमेरिकी मिसाइल के ‘क्रॉसफायर’ में 3 भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत, UN ने जताई कड़ी आपत्ति

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली | समुद्र की अथाह गहराईयां अक्सर अनगिनत रहस्यों को अपने भीतर समेटे रहती हैं, लेकिन आज ओमान के तट से जो खबर आई है, उसने भारत के कूटनीतिक हलकों से लेकर आम जनता के बीच एक गहरे सदमे और आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। मध्य पूर्व (Middle East) में चल रहे भू-राजनीतिक युद्ध की आग अब सीधे तौर पर निर्दोष भारतीयों को अपनी चपेट में लेने लगी है। ओमान के तट के करीब, एक भयंकर अमेरिकी मिसाइल हमले के दौरान ‘क्रॉसफायर’ (Crossfire) में फंसने से तीन भारतीय नाविकों की दुखद मौत हो गई है। यह घटना सिर्फ एक ‘कोलेटरल डैमेज’ (Collateral Damage) नहीं है, बल्कि दुनिया की दो महाशक्तियों की सैन्य तनातनी के बीच ग्लोबल सप्लाई चेन की रीढ़ माने जाने वाले भारतीय नाविकों की असुरक्षा का एक खौफनाक सबूत है।

क्या हुआ था ओमान तट पर? मौत के वो चंद घंटे
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना तब हुई जब अमेरिका ने ईरान-समर्थित ठिकानों और संदिग्ध जहाजों पर एक भारी जवाबी कार्रवाई (Retaliatory Strike) की थी। इसी इलाके से एक कमर्शियल मर्चेंट नेवी का जहाज गुजर रहा था, जिस पर ये तीन भारतीय नाविक तैनात थे। यह जहाज किसी भी संघर्ष का हिस्सा नहीं था और केवल व्यापारिक सामान ले जा रहा था।

प्रत्यक्षदर्शियों और नौसैन्य सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना द्वारा दागी गई मिसाइलों में से एक या उसका भारी मलबा इस मर्चेंट जहाज से टकराया। मिसाइल का प्रभाव इतना विनाशकारी था कि जहाज के डेक पर काम कर रहे तीन भारतीय नाविकों की मौके पर ही मौत हो गई। इस हमले ने उस पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस घटना को “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य” करार देते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।

UN प्रमुख की कड़ी निंदा: “यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है”
इस दर्दनाक घटना की गूंज सिर्फ नई दिल्ली और वाशिंगटन तक सीमित नहीं रही, बल्कि संयुक्त राष्ट्र (UN) के गलियारों तक भी पहुंच गई है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिकी मिसाइल हमले की निंदा की है। गुटेरेस ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “कमर्शियल शिपिंग रूट्स पर इस तरह के अंधाधुंध हमले अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का खुला उल्लंघन हैं। संघर्षरत पक्षों को यह समझना होगा कि उनके आपसी युद्ध की कीमत निर्दोष नागरिक नहीं चुका सकते।”

UN का यह कड़ा बयान अमेरिका पर कूटनीतिक दबाव बढ़ाने वाला है, जो अपनी सैन्य कार्रवाइयों को ‘सेल्फ डिफेंस’ बताकर जायज ठहराने की कोशिश कर रहा है।

भारत का कूटनीतिक रुख और अमेरिका पर दबाव
इस घटना ने भारत सरकार के लिए एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। एक तरफ अमेरिका भारत का ‘रणनीतिक साझेदार’ (Strategic Partner) है, वहीं दूसरी तरफ उसके ही सैन्य अभियान में भारतीय नागरिकों की जान गई है। साउथ ब्लॉक में चल रही आपात बैठकों से जो संकेत मिल रहे हैं, उसके अनुसार भारत इस मामले को हल्के में नहीं लेने वाला है।

भारत ने वाशिंगटन से इस घटना की ‘पारदर्शी और विस्तृत रिपोर्ट’ की मांग की है। भारत का स्पष्ट मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में किसी भी सैन्य अभियान के दौरान ‘कमर्शियल वेसल्स’ (व्यापारिक जहाजों) की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ (SOPs) का पालन क्यों नहीं किया गया?

विश्लेषण: खतरे में है भारत की ‘ब्लू-कॉलर डायस्पोरा’
अगर इस घटना का विश्लेषण किया जाए, तो यह केवल तीन नाविकों की दुखद मौत नहीं है। आज दुनिया भर के कमर्शियल जहाजों पर लगभग 2 लाख से अधिक भारतीय नाविक कार्यरत हैं। मध्य पूर्व और लाल सागर (Red Sea) से होकर गुजरने वाला यह रास्ता दुनिया के कुल व्यापार का 12% और ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा संभालता है।

जब तक इजरायल-ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा यह तनाव शांत नहीं होता, तब तक इस मार्ग से गुजरने वाले हर भारतीय नाविक की जान दांव पर लगी हुई है। भारत सरकार को अब सिर्फ कूटनीतिक विरोध (Diplomatic Protest) से आगे बढ़कर ‘सुरक्षा गारंटी’ सुनिश्चित करनी होगी। अगर भारतीय नौसेना इस क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों को एस्कॉर्ट नहीं करती है, तो भविष्य में ऐसी और भी दर्दनाक घटनाएं देखने को मिल सकती हैं। इन तीन नाविकों की मौत ने साफ कर दिया है कि महाशक्तियों के इस खूनी खेल में सबसे कमज़ोर कड़ी वही आम इंसान है जो मीलों दूर समंदर में अपने परिवार का पेट पालने गया था।