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1 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी का ‘मेगा ब्लूप्रिंट’

लखनऊ में 'इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव 2026' का शंखनाद, 'सप्लाई चेन' का नया ग्लोबल बॉस बनने की राह पर यूपी

लखनऊ/ रिपोर्ट: राघवेंद्र प्रताप सिंह: उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक और आर्थिक दिशा को बदलने के लिए आज राजधानी लखनऊ में एक ऐसे ऐतिहासिक विमर्श की शुरुआत हुई है, जो आने वाले समय में राज्य की पूरी भौगोलिक और औद्योगिक तस्वीर को बदलने की क्षमता रखता है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘1 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी’ (1 Trillion Dollar Economy) के महा-संकल्प को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से आज ‘ETGovernment इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव 2026’ का भव्य शंखनाद हो गया है। इस हाई-प्रोफाइल कॉन्क्लेव में प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक, देश-दुनिया के दिग्गज नीति निर्माता, बड़े औद्योगिक घरानों के सीईओ और ‘स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन’ (STF) के शीर्ष अधिकारियों ने शिरकत की है। बंद कमरों में शुरू हुआ यह महामंथन महज़ एक सरकारी औपचारिकता या भाषणों का मंच नहीं है, बल्कि यह उस ‘न्यू उत्तर प्रदेश’ का रणनीतिक ब्लूप्रिंट है, जो भारत के सबसे बड़े आर्थिक इंजन के रूप में खुद को स्थापित करने जा रहा है।

कृषि और धार्मिक पर्यटन से आगे: ‘सप्लाई चेन’ का नया लीडर
इस कॉन्क्लेव के गहरे रणनीतिक आयामों (The Deep Layer) को टटोला जाए, तो यह साफ संदेश देता है कि उत्तर प्रदेश अब अपनी पारंपरिक पहचान के खोल से बाहर निकल चुका है। एक समय था जब यूपी की अर्थव्यवस्था का पूरा दारोमदार केवल कृषि और धार्मिक पर्यटन पर निर्भर था। लेकिन साल 2026 का यह दौर गवाह है कि उत्तर प्रदेश ने वैश्विक व्यापार की नब्ज को पकड़ लिया है। चीन से वैश्विक कंपनियों के मोहभंग के बाद, यूपी खुद को दुनिया के सामने सबसे भरोसेमंद और विशाल ‘सप्लाई चेन हब’ (Supply Chain Hub) के रूप में पेश कर रहा है।

कॉन्क्लेव के पहले सत्र में बुनियादी ढांचे के विकास पर जो आंकड़े और योजनाएं सामने रखी गईं, वे हैरान करने वाली हैं। एक्सप्रेसवे का जाल बिछाने में देश में अव्वल रहने के बाद, अब राज्य का पूरा ध्यान ‘मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क’ और नए ‘इंडस्ट्रियल कॉरिडोर’ (Industrial Corridors) के निर्माण पर केंद्रित है। गंगा एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के किनारों पर विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर सीधे तौर पर दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (DMIC) से जुड़ रहे हैं, जो यूपी के बने उत्पादों को बिना किसी देरी के देश के बड़े बंदरगाहों तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

वैश्विक निवेशकों के पैसे का ‘लिटमस टेस्ट’
इस भव्य आयोजन का सबसे बड़ा लिटमस टेस्ट यह है कि वैश्विक निवेशकों द्वारा पूर्व में किए गए एमओयू (MoUs) और वादे वास्तव में ज़मीन पर कितनी तेज़ी और सुगमता से उतरते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस’ (Ease of Doing Business) को पीछे छोड़ते हुए अब ‘स्पीड ऑफ डूइंग बिजनेस’ का नारा दिया है।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि यूपी अब निवेश के लिए केवल ज़मीन और बिजली नहीं दे रहा है, बल्कि ‘सिंगल विंडो क्लीयरेंस 2.0’ के माध्यम से निवेशकों को प्रशासनिक लालफीताशाही से पूर्ण मुक्ति दे रहा है। कॉन्क्लेव में मौजूद ‘स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन’ के अधिकारियों ने एक विस्तृत प्रेजेंटेशन के जरिए दिखाया कि कैसे जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और अंतर्देशीय जलमार्गों (Inland Waterways) का विकास यूपी को सीधे वैश्विक व्यापारिक मार्गों से जोड़ रहा है।

चुनौतियां और दीर्घकालिक परिणाम
अगर इस पूरी कवायद का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जाए, तो 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य बिना एक अभूतपूर्व विनिर्माण (Manufacturing) क्रांति के संभव नहीं है। उत्तर प्रदेश के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी विशाल कार्यशील आबादी (Working Population) को उच्च तकनीक के अनुकूल कुशल (Skilled) बनाना है। लॉजिस्टिक्स और एक्सप्रेसवे तभी सार्थक होंगे जब राज्य के भीतर बड़े पैमाने पर सेमीकंडक्टर, ईवी (EV), डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के प्लांट काम करना शुरू करेंगे।

‘इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव 2026’ इस बात की खुली गवाही है कि लखनऊ के सत्ता के गलियारों में अब केवल राजनीतिक गुणा-भाग नहीं होता, बल्कि वहां ग्लोबल इकॉनमी और इंफ्रास्ट्रक्चर के बड़े समीकरण तय किए जाते हैं। यदि इस कॉन्क्लेव में तय किए गए लक्ष्यों का 80 प्रतिशत भी अगले दो वर्षों में ज़मीन पर उतर आता है, तो उत्तर प्रदेश को भारत की अर्थव्यवस्था का ‘ग्रोथ इंजन’ बनने से कोई नहीं रोक पाएगा। यह आयोजन यूपी की आर्थिक आक्रामकता का वह टर्निंग पॉइंट है, जिस पर दुनिया भर के कॉरपोरेट जगत की नजरें टिकी हुई हैं।