Trending

केंद्र सरकार, असम व नागालैंड के बीच समझौता

नई दिल्ली ( विवेक ओझा) : अफस्पा (AFSPA), यानी सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम, एक ऐसा विशेष कानून है जो अशांत क्षेत्रों में तैनात भारतीय सशस्त्र बलों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक और असाधारण शक्तियां प्रदान करता है। यह कानून अशांत घोषित इलाकों में अलगाववाद और उग्रवाद से निपटने के लिए लागू किया जाता है। अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को पूर्वोत्तर भारत को लेकर दो बड़े ऐलान किए। उन्होंने कहा कि 2027 तक एक-दो राज्यों को छोड़कर पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र से सशस्त्र बल (विशेष शक्तियां) अधिनियम (AFSPA) हटा लिया जाएगा। शाह ने कहा कि AFSPA के दायरे में लगातार हो रही कमी इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में शांति लौट रही है।

अफस्पा (AFSPA) के तहत सेना को प्राप्त विशेष अधिकार :

गिरफ्तारी का अधिकार: सेना के जवान किसी भी व्यक्ति को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकते हैं और किसी भी परिसर की तलाशी ले सकते हैं।

बल प्रयोग और गोली चलाने की छूट: यदि कोई व्यक्ति कानून या आदेश का उल्लंघन करता है, तो सुरक्षा बल उचित चेतावनी के बाद बल का प्रयोग कर सकते हैं और आवश्यकता पड़ने पर गोली तक चला सकते हैं।

सुरक्षा बलों को कानूनी संरक्षण: सेना के जवानों द्वारा की गई किसी भी कार्रवाई पर कानूनी मुकदमा चलाने या जांच करने के लिए केंद्र सरकार की पूर्व स्वीकृति (मंजूरी) लेना अनिवार्य होता है।

केंद्र सरकार या राज्य सरकार द्वारा किसी क्षेत्र या राज्य को “अशांत क्षेत्र” (Disturbed Area) घोषित करने के बाद ही यह लागू किया जाता है। यह कानून अक्सर अपने सख्त प्रावधानों और मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन के कारण विवादों में रहता है। आलोचकों और स्थानीय निवासियों का मानना है कि इन असीमित शक्तियों का कई बार दुरुपयोग होता है, जिसके चलते इसे पूरी तरह हटाने की मांग भी उठती रही है। मणिपुर की कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने इस कानून के खिलाफ लगभग 16 साल तक भूख हड़ताल की थी।

अफस्पा के विपक्ष में तर्क:

राज्य की स्वायत्तता का उल्लंघन: AFSPA की धारा 3 केंद्र सरकार को संबंधित राज्य की सहमति के बिना किसी भी क्षेत्र को अशांत क्षेत्र के रूप में नामित करने का अधिकार देती है। इससे राज्यों की स्वायत्तता कमज़ोर होती है और केंद्र सरकार द्वारा शक्ति का दुरुपयोग हो सकता है।

बल का अत्यधिक उपयोग: AFSPA की धारा 4 अधिकृत अधिकारियों को विशिष्ट शक्तियाँ प्रदान करती है, जिसमें व्यक्तियों के विरुद्ध आग्नेयास्त्रों का उपयोग भी शामिल है, जिसके परिणामस्वरूप संभावित मृत्यु हो सकती है।
यह प्रावधान सुरक्षा बलों द्वारा बल के अत्यधिक और असंगत उपयोग के बारे में चिंताएँ उत्पन्न करता है।

नागरिक स्वतंत्रता का उल्लंघन: धारा 4 अधिकारियों को बिना वारंट के गिरफ्तार करने और बिना किसी वारंट के परिसर को ज़ब्त करने तथा तलाशी लेने की शक्ति भी देती है।