अफ़वाहों के ‘क्रॉसफायर’ पर विदेश मंत्रालय का कड़ा प्रहार
चौथे जहाज 'MT Liaki Freedom' पर हमले की खबर को किया खारिज, कहा- 'सभी भारतीय पूरी तरह सुरक्षित'

पल्लवी श्रीवास्तव/ नई दिल्ली | यह कूटनीति और युद्ध का एक पुराना सिद्धांत है कि ‘फॉग ऑफ वॉर’ (Fog of War) यानी युद्ध की धुंध में सबसे पहले सच्चाई की मौत होती है। ओमान के तट के पास हाल ही में अमेरिकी मिसाइल के ‘क्रॉसफायर’ में तीन भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत के बाद, पूरे देश में गहरा शोक और आक्रोश व्याप्त है। इसी संवेदनशील माहौल के बीच, बीती रात एक बेहद खौफनाक और अपुष्ट खबर ने समुद्री व्यापार (Maritime Trade) और कूटनीतिक हलकों में भारी हड़कंप मचा दिया। कई अंतरराष्ट्रीय पोर्टल्स और सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि ‘MT Liaki Freedom’ नामक एक चौथे कमर्शियल जहाज को भी ओमान की खाड़ी में हमले का निशाना बनाया गया है।
लेकिन, इससे पहले कि यह अफवाह देश में पैनिक (दहशत) का रूप लेती और नाविकों के परिवारों की रातों की नींद छीनती, भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने त्वरित और आक्रामक रुख अपनाते हुए इन दावों को पूरी तरह से सिरे से खारिज कर दिया है।
अफवाह का तंत्र: कैसे फैली ‘MT Liaki Freedom’ पर हमले की खबर?
मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही भयंकर सैन्य तनातनी ने पूरे लाल सागर और ओमान की खाड़ी को एक ‘रेड ज़ोन’ में तब्दील कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, ‘MT Liaki Freedom’ जब ओमान के तट के पास से गुजर रहा था, तब तकनीकी कारणों से उसका ‘ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम’ (AIS) सिग्नल कुछ समय के लिए रडार से गायब हो गया था। उसी समय उस क्षेत्र में एक नौसैन्य ड्रिल भी चल रही थी। इन दो अलग-अलग घटनाओं को जोड़कर कुछ अंतरराष्ट्रीय समुद्री ट्रैकर्स ने इसे एक ‘मिसाइल या ड्रोन हमले’ के रूप में प्रचारित कर दिया।
चूंकि वैश्विक मर्चेंट नेवी में भारतीयों की संख्या बहुत बड़ी है, इसलिए इस खबर ने भारत में तुरंत खतरे की घंटी बजा दी।
साउथ ब्लॉक का त्वरित एक्शन: “दावे बेबुनियाद हैं”
इस संवेदनशील स्थिति को भांपते हुए, नई दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक (विदेश मंत्रालय का मुख्यालय) तुरंत हरकत में आया। भारतीय नौसेना के इंटेलिजेंस नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय समुद्री एजेंसियों के साथ रीयल-टाइम डेटा क्रॉस-चेक करने के बाद, विदेश मंत्रालय ने एक बेहद कड़ा आधिकारिक बयान जारी किया।
मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “MT Liaki Freedom पर हमले की जो रिपोर्ट्स मीडिया के एक हिस्से में चल रही हैं, वे पूरी तरह से बेबुनियाद, तथ्यहीन और भ्रामक हैं। हमारा कंट्रोल रूम पोत के ऑपरेटरों के साथ सीधे संपर्क में है। जहाज अपने तय मार्ग पर सुरक्षित आगे बढ़ रहा है और हम आश्वस्त करना चाहते हैं कि उस पर सवार एक-एक भारतीय नागरिक पूरी तरह से सुरक्षित है।”
द डीप लेयर (The Deep Layer): मनोवैज्ञानिक युद्ध और आर्थिक हेरफेर
एक रक्षा और भू-राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर इस घटना का मूल्यांकन किया जाए, तो यह साफ हो जाता है कि ऐसी अफवाहें केवल ‘गलतफहमी’ का नतीजा नहीं होतीं। यह एक सुनियोजित मनोवैज्ञानिक युद्ध (Psychological Warfare) का हिस्सा भी हो सकती हैं।
जब भी किसी बड़े व्यापारिक जहाज पर हमले की झूठी खबर फैलती है, तो वैश्विक बाज़ार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें अचानक उछल जाती हैं और समुद्री माल ढुलाई का बीमा (Freight Insurance Premium) रातों-रात आसमान छूने लगता है। इससे कुछ वैश्विक सटोरियों और गैर-राज्य तत्वों (Non-state actors) को भारी आर्थिक फायदा होता है। भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा इस खबर का तुरंत खंडन करना केवल अपने नागरिकों को आश्वस्त करने का कदम नहीं था, बल्कि इसने वैश्विक शिपिंग इकॉनमी को एक बड़े झटके और पैनिक से भी बचा लिया।
सुरक्षा की गारंटी: हाई-अलर्ट पर भारतीय नौसेना
विदेश मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण ने नाविकों के परिवारों को एक बड़ी राहत दी है। लेकिन भारत सरकार केवल बयानों तक सीमित नहीं है। खाड़ी क्षेत्र में किसी भी आपात स्थिति से निपटने और भारतीय ध्वज वाले या भारतीय क्रू वाले जहाजों को ‘सेफ पैसेज’ (सुरक्षित मार्ग) प्रदान करने के लिए भारतीय नौसेना के विध्वंसक (Destroyers) और टोही विमान (P-8I) लगातार इस क्षेत्र की निगरानी कर रहे हैं।
‘MT Liaki Freedom’ की यह घटना इस बात का कड़ा सबक है कि संकट के समय में ‘फेक न्यूज़’ हथियारों से भी ज्यादा घातक हो सकती है। विदेश मंत्रालय ने इस डैमेज कंट्रोल से यह स्पष्ट संदेश दिया है कि 2026 का भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह सतर्क है और किसी भी अंतरराष्ट्रीय अफवाह को देश के मनोबल से खेलने की इजाजत नहीं देगा।