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हिंद महासागर की बिसात पर भारत की बड़ी घेराबंदी

कल से शुरू हो रही IORA बैठक में अमेरिका को घेरेगा नई दिल्ली, कमर्शियल जहाजों पर हमलों का मुद्दा प्रमुखता से उठाने की तैयारी

अभिषेक सिंह/ नई दिल्ली | ओमान के तट पर अमेरिकी मिसाइल हमले के ‘क्रॉसफायर’ में तीन निर्दोष भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत का मामला अब महज़ एक द्विपक्षीय तनाव नहीं रह गया है। भारत ने इस कूटनीतिक और रणनीतिक चूक को वैश्विक मंच पर ले जाने का पूरा मन बना लिया है। कल, यानी 15 जून 2026 से शुरू हो रही ‘इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन’ (IORA) की बेहद महत्वपूर्ण और उच्च-स्तरीय बैठक में भारत इस मुद्दे को सबसे आक्रामक रूप से उठाने की तैयारी में है। साउथ ब्लॉक के बेहद पुख्ता सूत्रों के अनुसार, नई दिल्ली इस बहुपक्षीय मंच का उपयोग हिंद महासागर (Indian Ocean) और लाल सागर (Red Sea) के अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन में कमर्शियल जहाजों पर हो रहे अमेरिकी सैन्य हमलों और उनकी ‘अंधाधुंध’ कार्रवाई के खिलाफ एक मजबूत वैश्विक सहमति बनाने के लिए करेगा।

IORA का मंच और भारत की रणनीतिक योजना
‘इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन’ (IORA) हिंद महासागर के किनारे बसे 23 सदस्य देशों का एक ऐसा शक्तिशाली समूह है, जिसका मुख्य उद्देश्य समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक मार्गों को सुरक्षित रखना है। चूंकि इस पूरे क्षेत्र की कमान और सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी भौगोलिक रूप से भारत के कंधों पर आती है, इसलिए भारत इस मंच का ‘स्वाभाविक अगुआ’ (Natural Leader) है।

कल से शुरू हो रही इस बैठक में भारतीय राजनयिकों का मुख्य ध्यान इस बात पर होगा कि कैसे ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन’ (समुद्री आवाजाही की आज़ादी) की आड़ में महाशक्तियां अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन कर रही हैं। भारत का रुख बेहद साफ है: पश्चिम एशिया के तनाव के नाम पर व्यापारिक जहाजों और निर्दोष नाविकों को बलि का बकरा नहीं बनाया जा सकता।

किन बिंदुओं पर अमेरिका को घेरेगा नई दिल्ली?
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय विदेश मंत्रालय ने IORA देशों के सामने रखने के लिए एक बेहद कड़ा और तथ्य-आधारित ड्राफ्ट तैयार किया है। इसके तहत मुख्य रूप से तीन बातें प्रमुखता से उठाई जाएंगी:

सैन्य अभियानों के नियम (Rules of Engagement): भारत इस बात पर जोर देगा कि किसी भी देश की नौसेना (चाहे वह अमेरिका ही क्यों ना हो) को कमर्शियल शिपिंग कॉरिडोर के इतने करीब भारी मिसाइलें दागने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जिससे नागरिक जहाजों के लिए खतरा पैदा हो।

अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS): भारत, संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानूनों का हवाला देकर सदस्य देशों को एकजुट करेगा कि खुले समंदर में व्यापारिक संप्रभुता सर्वोपरि है और किसी भी एकतरफा कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही तय होनी चाहिए।

नाविकों की सुरक्षा के लिए वैश्विक प्रोटोकॉल: चूंकि आईओआरए देशों के लाखों नागरिक वैश्विक मर्चेंट नेवी में काम करते हैं, इसलिए भारत इन सभी देशों को एक साथ लाकर नाविकों के लिए एक ‘कम्पलसरी सेफ कॉरिडोर’ और कड़े सुरक्षा मानकों की वकालत करेगा।

द डीप लेयर (The Deep Layer): वैश्विक कूटनीति में भारत का बढ़ता कद
एक रक्षा और भू-राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर इस कदम का मूल्यांकन किया जाए, तो भारत की यह रणनीति बेहद दूरदर्शी है। अमेरिका के साथ द्विपक्षीय स्तर पर कड़ा विरोध दर्ज कराने के बाद, आईओआरए के मंच पर इस मुद्दे को उठाना वाशिंगटन पर चौतरफा कूटनीतिक दबाव बनाने का जरिया है।

भारत इस क्षेत्र में खुद को एक ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ (Net Security Provider) के रूप में पेश कर रहा है। नई दिल्ली यह संदेश दे रहा है कि हिंद महासागर का क्षेत्र किसी पश्चिमी महाशक्ति का निजी अखाड़ा नहीं है, बल्कि यहां के सुरक्षा समीकरण स्थानीय देशों की सहमति से तय होंगे। ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका, और इंडोनेशिया जैसे मजबूत आईओआरए सदस्य देश भी इस मुद्दे पर भारत के सुर में सुर मिला सकते हैं, क्योंकि उनके आर्थिक हित भी इसी व्यापारिक मार्ग से सीधे जुड़े हुए हैं।

कल से शुरू हो रहा यह सम्मेलन केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहने वाला; यह इस बात का लिटमस टेस्ट होगा कि 2026 का भारत वैश्विक कूटनीति के पटल पर अपने नागरिकों के खून की कीमत और अपनी समुद्री संप्रभुता को कितनी आक्रामकता से स्थापित करता है। पूरी दुनिया की नजरें अब कल की इस बैठक पर टिकी हैं।