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योग और डिजिटल कूटनीति का महासंगम

14 जून को 130 देशों के साथ नया 'यूट्यूब विश्व रिकॉर्ड' बनाने जा रहा भारत, जानिए क्या है 'आयुष' का मास्टरप्लान

राघवेंद्र प्रताप सिंह नई दिल्ली | योग अब केवल शरीर को मोड़ने या सांसों को नियंत्रित करने का प्राचीन विज्ञान नहीं रह गया है; यह 21वीं सदी में भारत की सबसे बड़ी और अजेय ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) बन चुका है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (IDY) 2026 की भव्य तैयारियों के बीच, भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने आज (14 जून) एक ऐसा वैश्विक दांव चला है, जो डिजिटल दुनिया और प्राचीन वेलनेस (Wellness) का सबसे बड़ा महासंगम बनने जा रहा है। आयुष मंत्रालय, मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (MDNIY) और ‘Habuild’ के संयुक्त तत्वावधान में आज एक ऐतिहासिक ‘वैश्विक ऑनलाइन योग कार्यक्रम’ आयोजित किया जा रहा है। इस महा-आयोजन का एकमात्र लक्ष्य सिर्फ योग करना नहीं है, बल्कि ‘यूट्यूब लाइव’ (YouTube Live) स्ट्रीम पर दुनिया के सबसे अधिक दर्शकों का एक नया और अभेद्य विश्व रिकॉर्ड स्थापित करना है।

आंकड़ों का खेल और 130 देशों की भागीदारी
आयोजकों के ब्लूप्रिंट पर नजर डालें तो इस आयोजन का स्केल (पैमाना) हैरान करने वाला है। इस एक सिंगल लाइव स्ट्रीम में दुनिया के 130 से अधिक देशों के प्रतिभागियों के जुड़ने की उम्मीद है। यह महज़ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक ‘ग्लोबल वेलनेस मूवमेंट’ है।

लेकिन इस बार जो चीज़ सबसे ज्यादा ध्यान खींच रही है, वह है इसका ‘टेक-इंटीग्रेशन’ (Tech-Integration)। भारत सरकार यह जानती है कि डिजिटल युग में कोई भी रिकॉर्ड बिना सीमलेस तकनीक के नहीं बन सकता। इसलिए, इस बार कागजी झंझटों को खत्म करते हुए एक नया सिस्टम लागू किया गया है। रिकॉर्ड में शामिल होने वाले सभी पंजीकृत प्रतिभागियों को सीधे उनके ‘व्हाट्सऐप’ (WhatsApp) पर उनका डिजिटल प्रतिभागिता प्रमाण पत्र (Digital Participation Certificate) भेज दिया जाएगा। यह कदम न केवल युवाओं को आकर्षित कर रहा है, बल्कि भारत के ‘डिजिटल इंडिया’ विजन का भी दुनिया भर में डंका बजा रहा है।

‘सॉफ्ट पावर’ का नया हथियार
एक भू-राजनीतिक और कूटनीतिक विश्लेषक के नज़रिए से इस आयोजन को देखें, तो यह सिर्फ एक गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड की कवायद नहीं है। जब 130 देशों के नागरिक एक ही समय पर, एक ही स्क्रीन को देखकर भारतीय ऋषियों की विधा का पालन करते हैं, तो भारत बिना कोई गोली चलाए या बिना कोई व्यापारिक समझौता किए उन देशों के समाज के भीतर अपनी गहरी पैठ बना लेता है।

पश्चिमी देश अपनी संस्कृति को हॉलीवुड और मल्टीनेशनल ब्रांड्स के जरिए दुनिया पर थोपते रहे हैं, लेकिन भारत ‘योग’ के जरिए दुनिया को मानसिक और शारीरिक शांति का वह उत्पाद निर्यात कर रहा है, जिसका कोई सानी नहीं है। यूट्यूब लाइव स्ट्रीम के ज़रिए इस आयोजन को ग्लोबल बनाने का फैसला यह साबित करता है कि सरकार अब कूटनीति के लिए पारंपरिक टीवी चैनलों या दूतावासों के बंद कमरों तक सीमित नहीं है। अब कूटनीति आम आदमी के स्मार्टफोन पर हो रही है। आज 14 जून का यह विश्व रिकॉर्ड, 21 जून को होने वाले मुख्य अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए एक ऐसा ‘वॉर्म-अप’ है, जिसकी गूंज संयुक्त राष्ट्र (UN) से लेकर सिलिकॉन वैली तक सुनाई देने वाली है।