16 जून को हर साल मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय परिवार प्रेषण दिवस

नई दिल्ली ( अभिषेक सिंह) : अंतर्राष्ट्रीय परिवार प्रेषण दिवस (इंटरनेशनल डे ऑफ फैमिली रेमिटेंसेज) हर वर्ष 16 जून को मनाया जाता है। यह दिन उन करोड़ों प्रवासी श्रमिकों के योगदान को सम्मान देने के लिए समर्पित है, जो अपने परिवारों के बेहतर भविष्य के लिए घर से दूर रहकर काम करते हैं और अपनी कमाई का एक हिस्सा नियमित रूप से अपने घर भेजते हैं। संयुक्त राष्ट्र समर्थित इस दिवस का उद्देश्य परिवार प्रेषण यानी रेमिटेंस की सामाजिक और आर्थिक भूमिका को रेखांकित करना है। दुनिया के कई विकासशील देशों में परिवार प्रेषण न केवल लाखों परिवारों की आजीविका का आधार है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण और छोटे व्यवसायों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अंतर्राष्ट्रीय परिवार प्रेषण दिवस की शुरुआत वर्ष 2015 में अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (आईएफएडी) की पहल पर की गई थी। इस दिन का मुख्य उद्देश्य यह बताना है कि विदेशों या अपने गृह क्षेत्र से दूर काम करने वाले श्रमिकों द्वारा भेजी गई धनराशि परिवारों और स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।
भारत लंबे समय से दुनिया में सबसे अधिक रेमिटेंस प्राप्त करने वाला देश बना हुआ है। खाड़ी देशों, अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में कार्यरत भारतीय पेशेवरों और श्रमिकों द्वारा भेजी जाने वाली धनराशि भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह धनराशि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लाखों परिवारों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में मदद करती है।
डिजिटल भुगतान ने बनाया प्रक्रिया को आसान
तकनीकी प्रगति और डिजिटल वित्तीय सेवाओं के विस्तार ने रेमिटेंस भेजने और प्राप्त करने की प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक आसान और तेज बना दिया है। मोबाइल बैंकिंग, डिजिटल वॉलेट और ऑनलाइन मनी ट्रांसफर प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब धनराशि कुछ ही मिनटों में एक देश से दूसरे देश तक पहुंचाई जा सकती है। हालांकि, विशेषज्ञ अब भी रेमिटेंस लेनदेन की लागत को कम करने की आवश्यकता पर जोर देते हैं। संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों में भी अंतर्राष्ट्रीय धन प्रेषण की लागत को कम करने का लक्ष्य शामिल है ताकि अधिक धन सीधे परिवारों तक पहुंच सके।