विश्व कप से पहले भारत को मिले नए हथियार, गिल बोले- भविष्य के लिए अच्छे संकेत
कुछ प्रमुख गेंदबाजों को विश्राम देने के भारतीय टीम प्रबंधन के फैसले ने अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे श्रृंखला में नए और कम अनुभवी गेंदबाजों को खुद को साबित करने का मौका दिया। इन युवा खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न केवल भारत को श्रृंखला में 3-0 की जीत दिलाने में योगदान दिया, बल्कि अगले वर्ष होने वाले विश्व कप से पहले कप्तान शुभमन गिल और टीम प्रबंधन का भरोसा भी मजबूत किया।
आईपीएल के व्यस्त और थकाऊ सत्र के बाद जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज और अक्षर पटेल जैसे वरिष्ठ खिलाड़ियों को आराम दिया गया था। उनकी अनुपस्थिति में भारत ने गुरनूर बराड़, प्रिंस यादव और हर्ष दुबे जैसे नए गेंदबाजों पर भरोसा जताया। खास बात यह रही कि तीनों खिलाड़ियों ने इसी श्रृंखला में अपना वनडे पदार्पण भी किया।
इनमें गुरनूर बराड़ सबसे प्रभावशाली साबित हुए। उन्होंने अपनी तेज गति और अतिरिक्त उछाल से बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया और श्रृंखला में कुल सात विकेट अपने नाम किए। वहीं, प्रिंस यादव और हर्ष दुबे ने भी धर्मशाला और लखनऊ जैसी बल्लेबाजों के अनुकूल सपाट पिचों पर अनुशासित गेंदबाजी करते हुए प्रभावित किया। उनके प्रदर्शन से कप्तान शुभमन गिल काफी संतुष्ट नजर आए।

श्रृंखला में भारत की 3-0 की जीत के बाद गिल ने कहा, “मुझे लगता है कि भारतीय क्रिकेट के लिए यह बेहद अच्छे और उत्साहजनक संकेत हैं कि हम लगातार ऐसे तेज गेंदबाज तैयार कर रहे हैं जो अच्छी गति से गेंदबाजी कर सकते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “अब हमारे पास तेज गेंदबाजों का एक मजबूत समूह है जो लगातार 140 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से गेंदबाजी कर सकता है। ये गेंदबाज लंबे कद के हैं, सही क्षेत्रों में गेंद डाल सकते हैं और तब भी अवसर पैदा कर सकते हैं जब विकेट या परिस्थितियां गेंदबाजों के पक्ष में ज्यादा मददगार न हों।”
गिल विशेष रूप से इस बात से प्रभावित दिखे कि युवा गेंदबाजों ने मैच परिस्थितियों को समझते हुए अपनी रणनीति को कितनी अच्छी तरह लागू किया। उन्होंने कहा, “यह सब परिस्थितियों के सही आकलन और अलग-अलग विकेटों पर उपयुक्त लेंथ चुनने से जुड़ा है।”
उन्होंने आगे कहा, “एक गेंदबाजी इकाई के रूप में हमारा प्रयास यह समझना है कि हम स्टंप के ऊपरी हिस्से पर कितनी निरंतरता के साथ गेंद डाल सकते हैं, क्योंकि उस क्षेत्र में डाली गई गेंद पर शॉट लगाना बल्लेबाजों के लिए सबसे कठिन होता है।”
गिल की इस सोच का सबसे बेहतरीन उदाहरण प्रसिद्ध कृष्णा के प्रदर्शन में देखने को मिला। तीसरे वनडे में उन्होंने शुरुआती 10 ओवरों के भीतर ही चार विकेट झटक लिए और अंत में पांच विकेट लेकर अपने वनडे करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया।
कर्नाटक के इस तेज गेंदबाज की पहचान आमतौर पर हार्ड लेंथ पर गेंदबाजी करने वाले गेंदबाज के रूप में होती है, लेकिन चेन्नई की परिस्थितियों को भांपते हुए उन्होंने अपनी रणनीति में बदलाव किया और स्टंप्स के करीब फुल लेंथ गेंदबाजी करने का विकल्प चुना, जिसका उन्हें भरपूर फायदा मिला।
प्रसिद्ध कृष्णा की प्रशंसा करते हुए गिल ने कहा, “हम सभी ने उसकी क्षमता देखी है। अगर वह लगातार सही क्षेत्रों में गेंदबाजी करता है तो वह हमारे लिए एक ऐसे गेंदबाज बन सकता है जो नियमित रूप से अवसर पैदा करे। यदि वह ऐसा करना जारी रखता है तो यह टीम के लिए बहुत अच्छी बात होगी।”