Trending

जलभराव पर ‘जीरो टॉलरेंस’: सीएम योगी का 48 घंटे का सख्त अल्टीमेटम, नालों और ड्रेनेज सिस्टम की सफाई में लापरवाही पर गिरेगी गाज

राघवेंद्र प्रताप सिंह/ लखनऊ:उत्तर प्रदेश में मानसून की धमाकेदार एंट्री और कई जिलों में हो रही झमाझम बारिश के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक मशीनरी के पेंच कसने शुरू कर दिए हैं। हर साल मानसून के दौरान शहरों में होने वाले जलभराव (Waterlogging) और उससे पैदा होने वाली जन-समस्याओं को इस बार गंभीरता से लेते हुए सीएम योगी ने एक बेहद सख्त और स्पष्ट आदेश जारी किया है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों (DMs), नगर आयुक्तों और संबंधित विभागों को ’48 घंटे का अल्टीमेटम’ देते हुए शहरों के ड्रेनेज सिस्टम और बड़े नालों की शत-प्रतिशत सफाई सुनिश्चित करने का कड़ा निर्देश दिया है।

लोक भवन में बुलाई गई एक उच्च-स्तरीय मानसून समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री का लहजा बेहद तल्ख रहा। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि अगर किसी भी शहर की सड़कों, वीआईपी इलाकों या रिहायशी कॉलोनियों में पानी भरता है, तो इसकी सीधी जिम्मेदारी संबंधित जिलाधिकारी और नगर निगम के अधिकारियों की होगी।

सीएम योगी के कड़े निर्देश: 48 घंटे में क्या-क्या होगा?
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने शहरी विकास विभाग, लोक निर्माण विभाग (PWD) और जल निगम को आपसी समन्वय के साथ युद्धस्तर पर काम करने का निर्देश दिया है। अगले 48 घंटों के लिए जो ‘टास्क फोर्स’ और कार्ययोजना तय की गई है, उसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

नालों की डी-सिल्टिंग (De-silting): सभी छोटे-बड़े नालों की तली झाड़ सफाई की जाए। सीवर लाइनों और ड्रेनेज में फंसी प्लास्टिक और कचरे को तुरंत निकाला जाए, ताकि बारिश के पानी का बहाव निर्बाध रूप से हो सके।

पंपिंग स्टेशनों की जांच: निचले इलाकों (Low-lying areas) और अंडरपास में जमा पानी निकालने के लिए सभी पंपिंग स्टेशनों को 24×7 एक्टिव मोड पर रखा जाए। खराब पड़े पंपों को तुरंत बदला जाए।

खुले मैनहोल और गड्ढों पर एक्शन:* बारिश के दौरान खुले सीवर और मैनहोल जानलेवा साबित होते हैं। सीएम ने कड़े निर्देश दिए हैं कि प्रदेश का कोई भी मैनहोल खुला नहीं रहना चाहिए।

बिजली विभाग को अलर्ट: बारिश के समय टूटे तारों और करंट उतरने (जैसे हाल ही में अमेठी में हुए हादसे) की घटनाओं को रोकने के लिए बिजली विभाग को जर्जर खंभों और लटकते तारों को तुरंत दुरुस्त करने को कहा गया है।

जवाबदेही तय: ‘कागजी रिपोर्ट नहीं, धरातल पर काम चाहिए’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि उन्हें एसी कमरों में बैठकर तैयार की गई ‘कागजी साफ-सफाई’ की रिपोर्ट नहीं चाहिए। उन्होंने जिलाधिकारियों को खुद सड़कों पर उतरकर ड्रेनेज सिस्टम का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) करने का निर्देश दिया है।

इस बार सफाई अभियान की निगरानी के लिए ड्रोन कैमरों (Drone Cameras) का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के स्तर पर एक विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहाँ से हर जिले की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। यदि 48 घंटे की डेडलाइन के बाद किसी इलाके से जलभराव या नालों के चोक होने की तस्वीर सोशल मीडिया या न्यूज़ चैनल्स पर आती है, तो संबंधित क्षेत्र के अधिकारियों पर तत्काल निलंबन (Suspension) की गाज गिरना तय है।

प्रशासनिक सर्जरी और जनता की उम्मीदें
मुख्यमंत्री का यह 48 घंटे का अल्टीमेटम प्रदेश की अफसरशाही के लिए एक बड़ा ‘वेक-अप कॉल’ है। अक्सर देखा गया है कि नगर निगम मानसून से पहले सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये का बजट तो खर्च कर देते हैं, लेकिन पहली ही भारी बारिश में स्मार्ट सिटी की सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं।

सीएम योगी के इस ‘जीरो टॉलरेंस’ एक्शन से जनता के भीतर यह उम्मीद बंधी है कि इस बार उन्हें बारिश के मौसम में घुटनों तक भरे गंदे पानी, जाम पड़े ट्रैफिक और संक्रामक बीमारियों से निजात मिलेगी। अब अगले 48 घंटे स्थानीय प्रशासन के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं हैं, क्योंकि इस बार लापरवाही की कीमत अधिकारियों को अपनी कुर्सी गंवा कर चुकानी पड़ सकती है।