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लखनऊ अग्निकांड में जान गंवाने वाले तीन बच्चों का अलग-अलग स्थान पर हुआ अंतिम संस्कार, डिप्टी सीएम ने पहुंच कर दी श्रद्धांजलि, परिजनों को बंधाया ढाढ़स

लखनऊ। अलीगंज के पुरनिया स्थित बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग में अपनी जान गंवाने वाले मासूम बच्चों की अंतिम विदाई के पल इतने भावुक और हृदयविदारक थे कि वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। हादसे का शिकार हुए होनहार छात्रों अनुष्ठा राई, सुखमनी सिंह, नीलेश और ज्योति के पार्थिव शरीरों का आज लखनऊ के अलग-अलग श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार किया गया। अपनों को खो चुके परिवारों की चीख-पुकार और करुण क्रंदन से श्मशान घाट की दीवारें तक दहल उठीं।

 

अलग-अलग घाटों पर दी गई मुखाग्नि, पसरा सन्नाटा

पुण्य आत्माओं के अंतिम संस्कार के लिए आज सुबह से ही परिजनों और शुभचिंतकों की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी।

 

शहर के बैकुंठ धाम (भैंसा कुंड), वीआईपी रोड आलमबाग और पिपरा घाट (दिलकुशा) पर पूर्ण विधि-विधान और बेहद गमगीन माहौल के बीच इन मासूम बच्चों को मुखाग्नि दी गई।

जो बच्चे कल तक अपने सुनहरे भविष्य का सपना लेकर घर से निकले थे, आज उनकी अर्थियां उठती देख पूरा मोहल्ला और शहर रो पड़ा।

डिप्टी सीएम ने दी विनम्र श्रद्धांजलि, पीड़ित परिवारों से मिले

इस बेहद दुखद घड़ी में उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) ने खुद बैकुंठ धाम, आलमबाग, भैंसा कुंड और पिपरा घाट पहुंचकर गोलोकवासी पुण्यात्माओं को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

 

डिप्टी सीएम ने शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात की और उन्हें ढाढ़स बंधाया। परिजनों के आंसू पोछते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा, “यह पूरे प्रदेश के लिए एक अपूरणीय क्षति और अत्यंत हृदयविदारक घटना है। मासूम बच्चों का इस तरह चले जाना असहनीय दुख है। सरकार इस कठिन समय में पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। इस खूनी लापरवाही के दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाया जाएगा।”