23 जून को हर साल मनाया जाता है अंतर्राष्ट्रीय विधवा दिवस

नई दिल्ली ( अभिषेक सिंह) : दुनियाभर में हर साल अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस 23 जून को मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य है विश्व स्तर पर विधवाओं को सशक्त बनाना। अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस की स्थापना विभिन्न संगठनों के प्रयासों से प्रेरित थी जिसमें लूम्बा फाउंडेशन भी शामिल था। यह एक अंतरराष्ट्रीय चैरिटी है जो विधवाओं के अधिकारों के हक के लिए लड़ती है। जीवनसाथी को खोने का दर्द किसी को भी तोड़कर रख सकता है। खासतौर पर महिलाएं अपने पति को खोने के बाद बहुत ही बेसहारा महसूस करती हैं। दुनियाभर में कई विधवाएं गरीबी, भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार का सामना करती हैं।
अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस का इतिहास :
अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस को पहली बार 23 जून, 2011 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता दी गई थी। जिसमें वैश्विक स्तर पर विधवाओं के सामने आने वाली कठिनाइयों, अधिकारों और कल्याण करने के उद्देश्य से इस दिन को मनाने की मान्यता मिली।
अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस की स्थापना विभिन्न संगठनों के प्रयासों से प्रेरित थी, जिसमें लूम्बा फाउंडेशन भी शामिल था। यह एक अंतरराष्ट्रीय चैरिटी है, जो विधवाओं के अधिकारों के हक के लिए लड़ती है। इस फाउंडेशन ने विधवाओं की चुनौतियों को दूर करने के लिए अथक प्रयास किया। लूम्बा फाउंडेशन ने विधवाओं के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चलाया।
हालांकि, संयुक्त राष्ट्र द्वारा इसे स्वीकार किए जाने से पहले ही लूम्बा फाउंडेशन 2005 से ही इस दिन को मना रहा है । इस फाउंडेशन की स्थापना लंदन में हाउस ऑफ लॉर्ड्स के सदस्य राजिंदर पॉल लूम्बा ने विकासशील देशों में विधवाओं की समस्याओं के समाधान के लिए की थी।
अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस का महत्व :
अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस का मुख्य उद्देश्य है कि दुनियाभर में विधवाओं के जीवन को बेहतर बनाना और उन्हें पूरे अधिकारों की मान्यता मिले। इसी मकसद को पूरा करने के लिए हर साल अंतरराष्ट्रीय विधवा दिवस मनाया जाता है। विधवाओं को उचित रोजगार, आय, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा आदि सुविधाएं देने के लिए इस दिन चर्चा की जाती है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि विधवाओं को अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करने में सक्षम होना चाहिए। इसके लिए सामाजिक भेदभाव को दूर करना आवश्यक है।
दुनियाभर में करोड़ों महिलाएं विधवा के रूप में जीवन जी रही हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, उनकी संख्या 25 करोड़ से अधिक है और इनमें से बड़ी संख्या आर्थिक एवं सामाजिक चुनौतियों का सामना करती है। भारत और चीन उन देशों में शामिल हैं जहां विधवा महिलाओं की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। भारत में भी करोड़ों महिलाएं इस वर्ग का हिस्सा हैं। इनमें बड़ी संख्या आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आती है। वहीं, देश में पूर्व सैनिकों की विधवाओं की संख्या भी लाखों में है, जिनके योगदान और संघर्ष को विशेष रूप से सम्मान देने की आवश्यकता है।