Trending

दूसरे पैक्स सिलिका शिखर सम्मेलन में भारत ने एआई प्रौद्योगिकियों को सशक्त बनाने की अमरीकी पहल पर किए हस्ताक्षर

नई दिल्ली ( विवेक ओझा) : अमरीका में आयोजित दूसरे पैक्स सिलिका शिखर सम्मेलन में कल भारत ने 34 अन्य देशों के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस प्रौद्योगिकियों को सशक्त बनाने के लिए अमरीका के नेतृत्व वाली एक पहल पर हस्ताक्षर किए। अमरीका के आर्थिक मामलों के विदेश मंत्री जैकब हेलबर्ग ने कहा कि एआई अवसर पर शामिल होने वाले देशों ने एआई युग के लिए विकास-समर्थक और नवाचार-समर्थक नियामक दृष्टिकोण का समर्थन किया है।

शिखर सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन और भारतीय उद्योग के प्रतिनिधियों ने किया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने उद्योग जगत के नेताओं के साथ सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और लचीली प्रौद्योगिकी आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।

क्या है पैक्स सिलिका?

पैक्स सिलिका (Pax Silica) अमेरिका के नेतृत्व वाला एक अंतरराष्ट्रीय पहल है, जो ट्रंप प्रशासन के दौरान दिसंबर 2025 में शुरू की गई। यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सेमीकंडक्टर जैसी अत्याधुनिक तकनीकों की सुरक्षित, लचीली और नवाचार-आधारित सप्लाई चेन बनाने पर केंद्रित है। इसके नाम के मतलब की बात करें तो Pax लैटिन शब्द है जिसका अर्थ है शांति, स्थिरता और दीर्घकालिक समृद्धि और Silica सिलिकॉन डाइऑक्साइड (SiO₂) को संदर्भित करता है जो शुद्ध सिलिकॉन में रिफाइन होकर कंप्यूटर चिप्स और AI हार्डवेयर का आधार बनता है। यह नाम पूरी तरह से AI युग में तकनीकी प्रभुत्व और विश्वसनीय साझेदारों के बीच शांति व स्थिरता का प्रतीक है यानी “चिप्स और AI के माध्यम से शांति”।

भारत अमेरिका के 35 देशों वाले पैक्स सिलिका समूह का आधिकारिक तौर पर सदस्य है। भारत की एंट्री के साथ ये क्लब 35 देशों की हो गई है। इन 35 देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टेक्नोलॉजी के लिए भरोसेमंद और मजबूत सप्लाई चेन बनाने की अमेरिकी पहल पर साइन किए हैं जबकि ट्रंप प्रशासन ने अभी तक पाकिस्तान से पूछा तक नहीं है। पाकिस्तान को इसका सदस्य नहीं बनाया गया है।

पैक्स सिलिका गठबंधन का मकसद चीन पर निर्भरता कम करते हुए एक भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाना है। इसमें प्राइवेट सेक्टर को साथ लाने और उस इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की सोच रखी गई है। सबसे बड़ा मकसद ये है कि दुर्लभ खनिजों के साथ चीन ने जो दबदबा बनाया है उससे निर्भरता कम करना है। पैक्स सिलिका में अर्जेंटीना, जर्मनी, नीदरलैंड, चिली, कोस्टा रिका, ग्रीस, कजाकिस्तान, पनामा जैसे देश भी शामिल हैं।

पैक्स सिलिका में शामिल होने से भारत को क्या फायदे होंगे?

पैक्स सिलिका ग्रुप में शामिल होने से भारत को एआई चलाने के लिए सुपरफास्ट कंप्यूटर चिप्स मिल सकेंगे। एडवांस्ड सेमीकंडक्टर्स और चिप्स की बिना रुकावट सप्लाई सुनिश्चित होगी।

इस वक्त दुनिया में क्रिटिकल मिनरल्स और चिप मैन्युफैक्चरिंग पर चीन का दबदबा है। पैक्स सिलिका में शामिल होने से चीन कूटनीतिक दुश्मनी के चलते भारत की एआई सप्लाई चेन को ब्लॉक या ब्लैकमेल नहीं कर पाएगा।

अमेरिका और भारत के बीच इस साझेदारी से भारत में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, बड़े डेटा सेंटर्स और सुपरकंप्यूटिंग पावर को बढ़ाने के लिए अरबों डॉलर का विदेशी निवेश (FDI) आएगा।

दुनिया भर के एआई बिल्डर्स भारतीय इंजीनियर्स को अपनी कंपनी में रखना चाहते हैं। इस गठबंधन से भारत के युवाओं को ग्लोबल एआई प्रोजेक्ट्स, रिसर्च और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग में सीधे काम करने के बड़े मौके मिलेंगे।

भारत का लक्ष्य साल 2047 तक टॉप-3 एआई सुपरपावर बनने का है। भारत अब अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे दिग्गजों के साथ करीब से काम कर सकता है।